जिंदान के हत्यारों को सजा नहीं मिलने से आक्रोशित लोगों का प्रदेशभर में धरना प्रदर्शन

दलित नेता केदार सिंह जिंदान की निर्मम हत्या को लगभग 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन प्रदेश की भाजपा सरकार ने जो आश्वासन दिया था वह अभी तक पूरा नहीं होने से हिमाचल के लोगों में काफी आक्रोश है। इसी सिलसिले में दलित शोषण मुक्ति मंच, सीटू, माकपा समेत अनेक संगठनों ने प्रदेशभर में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। फारवर्ड प्रेस की रिपोर्ट :

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में युवा दलित नेता व अधिवक्ता केदार सिंह जिंदान की गाड़ी से कुचलकर निर्मम हत्या कर दी गयी थी। जिंदान की हत्या को लगभग 20 दिन से अधिक हो गये हैं लेकिन प्रदेश की भाजपा सरकार ने जो आश्वासन दिया था वह अभी तक पूरा नहीं होने से नाराज ‘दलित शोषण मुक्ति मंच’ ने प्रदेशभर में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिसे सीटू (सेन्ट्रल ऑफ इन्डियन ट्रेड यूनियन), माकपा (मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी) और अन्य दलित संगठनों द्वारा भी सहयोग मिल रहा है। मंच की मांग है कि जिंदान के कातिलों को सख्त सजा एवं परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए।

दलित शोषण मुक्ति मंच द्वारा राजधानी शिमला सहित ठियोग, रामपुर बुशहर, सिरमौर सहित अनेक जगह विरोध प्रदर्शन किया गया। शिमला में मंच द्वारा डीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया गया। इसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया गया।

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मंच के अध्यक्ष जगत राम ने आरोप लगाया कि जिंदान की हत्या साजिश के तहत की गयी और हत्यारों को अभी तक कोई सजा नहीं दी गयी है। जगत राम ने कहा कि सरकार ने 9 सितंबर को रिज मैदान में आश्वासन दिया था कि जिंदान के परिवार को 20 लाख की सहायता राशि दी जाएगी। इसके अलावा केदार की पत्नी को सरकारी नौकरी और बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाएगी। लेकिन घटना के 20 दिन बाद भी सरकार किये वादे को पूरा नहीं कर पायी है।

शिमला में प्रदर्शन करते दलित शोषण मुक्ति मंच के कार्यकर्ता

सभा को संबोधित करते हुए ठियोग के विधायक और सीटू नेता राकेश सिंघा ने कहा कि सरकार के लापरवाह रैवये के कारण प्रदेश में दलितों और गरीबों पर अत्याचार बढ़े हैं। सरकार जब तक वादे को पूरा नहीं करती, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। अन्य नेताओं ने ‘अनुसूचित जाति, जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989’ को सख्ती से लागू करने की मांग किया। विरोध प्रदर्शन में जगतराम, हरिचंद, रवि कुमार, कर्मचंद भाटिया, रोशन लाल डोगरा, राजेश, अनिता समेत काफी संख्या में लोग शामिल थे।

वहीं ठियोग में भी जिंदान के हत्यारों को कड़ी सजा देेने की मांग को लेकर दलित शोषण मुक्ति मंच के बैनर तले प्रदर्शन किया गया। प्रेमघाट से एसडीएम कार्यालय तक मार्च करते हुए कार्यकर्ताओं ने हत्यारों को धारा 302 के तहत सजा देने, जिंदान के परिवार को 20 लाख रुपये, पत्नी को सरकारी नौकरी, बेटियों को मुफ्त शिक्षा, पक्का मकान, गवाहों को सुरक्षा देने की मांग की। एसडीएम कार्यालय पहुंचकर मंच के सदस्यों ने मुख्यमंत्री के नाम अपर-जिलाधिकारी नारायण सिंह वर्मा को ज्ञापन सौंपा।

केदार सिंह जिंदान को न्याय दिलाने की मांग को लेकर ठियोग में अपर-जिलाधिकारी को ज्ञापन देते ‘दलित शोषण मुक्ति मंच’ के कार्यकर्ता

ज्ञात हो कि बीते 7 सितंबर, 2018 को हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में युवा दलित नेता व अधिवक्ता केदार सिंह जिंदान की गाड़ी से कुचलकर निर्मम हत्या कर दी गयी थी। पहले तो पुलिस ने इसे दुर्घटना साबित करने पर तुली थी, लेकिन लोगों के विरोध प्रदर्शन से दबाव में आकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिन्होंने जुर्म कबूल किया। इसके बाद सरकार द्वारा मृतक केदार सिंह जिंदान के परिजनों को 20 लाख रुपये का मुआवजा, जिसमें साढ़े आठ लाख तुरंत देने और बाकी बाद में देने, इसके अलावा मृतक के बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने व पत्नी को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की गयी थी।

इस मामले में माकपा के पार्टी राज्य सचिव एवं ठियोग से विधायक राकेश सिंघा कहते हैं कि हिमाचल में इस तरह की निर्मम हत्या पहली बार हुई है, यह

बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। केदार की जिंदगी बचाने में सिरमौर पुलिस पूरी तरह असफल रही है। सरकार ने जो भी वायदे किये हैं, उसे पूरा करे। इस निर्मम हत्या के चश्मदीद गवाहों को सुरक्षा प्रदान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। माकपा इस संघर्ष मे हर समय मजबूती के साथ खड़ी रहेगी।

(कॉपी-संपादन : राजन)


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