दिल्ली विश्वविद्यालय में ओबीसी को मिल रहा 27 प्रतिशत से कम आरक्षण

दिल्ली विश्वविद्यालय में पिछले पांच वर्षों में ओबीसी कोटे के छात्रों की संख्या तो बढ़ी है लेकिन ओबीसी कैटेगरी के स्थायी शिक्षकों की बहाली नहीं की गयी है। वहीं 6 कॉलेज ऐसे हैं जहां न तो ओबाीसी छात्रों को आरक्षण मिलता है और न ही ओबीसी कोटे के शिक्षकों की बहाली की जाती है

दिल्ली विश्वविद्यालय में ओबीसी के हितों की हकमारी हो रही है। प्रति वर्ष ओबीसी छात्रों को एडमिशन दिए जाने के बावजूद उसकी मात्रा में जितनी सीटें शिक्षकों की भरी जानी थी उसकी तुलना में ओबीसी वर्ग के स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है। दिल्ली विश्वविद्यालय की विद्वत परिषद के सदस्य प्रो. हंसराज ‘सुमन ‘ने  यूजीसी के चेयरमैन प्रो. डी. पी. सिंह को पत्र लिखकर मांग की है कि विभागों और कॉलेजों में पिछले पांच वर्षों से ओबीसी कोटे के कारण की बढ़ी हुई सीटों को भरने के लिए यूजीसी कॉलेजों को सेकेंड ट्रांच(दूसरे चरण) की बची हुई शिक्षकों के पदों को दिए नियुक्ति की प्रक्रिया शुरु की जाय।

प्रो. सुमन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति को भी इस संदर्भ में एक पत्र लिखकर कहा है कि डीयू प्रशासन यूजीसी को विश्वविद्यालय के विभागों और कॉलेजों में भरी जाने वाली दूसरे चरण की सीटों के लिए यूजीसी चेयरमैन को पत्र लिखें ताकि ओबीसी कोटे के शिक्षकों की दूसरे चरण की सीटें जल्द मिल सके।

दिल्ली विश्वविद्यालय एकेडमिक काउंसिल के सदस्य प्रो. हंसराज ‘सुमन’

उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में ओबीसी छात्रों के लिए आरक्षण का प्रावधान वर्ष 2007 में किया गया था लेकिन शिक्षकों की नियुक्तियां 2013 के बाद से होनी शुरू की गई। 2013 से अबतक ओबीसी कोटे के लगभग 100 शिक्षक ही स्थायी हुए हैं बाकि जिन कॉलेजों व विभागों में कार्यरत हैं वे एडहॉक शिक्षक के रूप में हैं। इस प्रकार कॉलेजों में जितनी संख्या में ओबीसी शिक्षक होने चाहिए, नहीं है। ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत का कोटा पूरा नहीं किया गया है। इसी तरह से डीयू के 6 कॉलेजों में ओबीसी आरक्षण नहीं दिया जा रहा है वे कॉलेज न तो छात्रों को एडमिशन देते हैं और न ही शिक्षकों की नियुक्ति करते हैं वे अपने को अल्पसंख्यक कॉलेज मानते हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय का प्रशासनिक भवन

प्रो. सुमन ने बताया कि वर्ष 2017 में दिल्ली विश्वविद्यालय के तहत संबद्ध, संघटित और मान्यता प्राप्त कुल 90 कॉलेज में से 45 कॉलेजों ने अपने यहां स्थायी पदों का विज्ञापन निकाला जिसमें 5 कॉलेजों ने अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त होने के कारण ओबीसी शिक्षकों के पद नहीं निकाले। कुल 2047 पदों का विज्ञापन निकाला गया जिसमें ओबीसी कोटे के पदों की संख्या 498 थी। इन पदों के आलोक में विज्ञापन प्रकाशित हुए 15 महीने बीत चुके हैं लेकिन स्थायी नियुक्तियां नहीं हुई है। जबकि निकाले गए विज्ञापन के आधार पर 4 लाख 11 हजार आवेदन पत्र प्राप्त हुए।विश्वविद्यालय ने आवेदन पत्रों की विषयवार स्क्रूटनी और स्क्रीनिंग का कार्य पूरा करने के बाद उम्मीदवारों के अंक विभाजन कर मेरिट लिस्ट बन चुकी है। जिन 62 विषयों की स्क्रीनिंग लिस्ट तैयार की गई थी उनकी लिस्ट संबंधित कॉलेजों व विभागों को भेजी भी जा चुकी है।



कॉलेज के नाम

 
ओबीसी शिक्षकों के रिक्त पदों की संख्या
कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज16
हंसराज कॉलेज16
जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज20
कालिंदी कॉलेज20
किरोड़ीमल कॉलेज15
लक्ष्मीबाई कॉलेज16
मैत्रीय कॉलेज17
पीडीजीवी कॉलेज18
राजधानी कॉलेज19
रामलाल आनंद कॉलेज15
सत्यवती कॉलेज14
शिवाजी कॉलेज21
श्यामलाल कॉलेज17
श्री अरबिंदो कॉलेज20
स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज18
गार्गी कॉलेज16

 

प्रो. सुमन ने बताया कि जिन सीटों के परमानेंट अपॉइंटमेंट के लिए जो विज्ञापन निकाले गए थे उन पदों को भरने के लिए जल्द से जल्द प्रक्रिया शुरू की जाय। यदि इन पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू नहीं की तो विज्ञापनों की समय सीमा समाप्त हो जाएगी और सारे विज्ञापन स्वत: ही रद्द हो जायेगें जिससे उम्मीदवारों को धन व समय की बर्बादी होगी।

प्रो. सुमन ने अपने पत्र में बताया है कि पिछले एक दशक से भी अधिक समय से खाली पदों पर पढ़ा रहे एडहॉक शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति न हो पाने के कारण वे बेहद तनाव पूर्ण जीवन जीने को मजबूर है। जब 2007 से ओबीसी आरक्षण लागू किया था लेकिन आज तक इन पदों पर 5 प्रतिशत भी स्थायी नियुक्ति नहीं हुई है। ऐसी स्थिति में लगता है कि इन पदों को भरने में एक दशक और लग जायेगा।

(कॉपी संपादन : एफपी डेस्क)


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