हिमाचल : ओबीसी महासभा की मांग, प्रमाण पत्र की वैधता हो 5 साल

हिमाचल प्रदेश में ओबीसी प्रमाण-पत्र सिर्फ एक साल वैध माना जाता है, जिसके चलते इस समुदाय के लोगों को हर साल नया प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए बहुत सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ओबीसी महासभा ने प्रमाण-पत्र की वैधता 5 वर्ष करने की मांग की है। बी. आनंद की रिपोर्ट :

शिमला : 4 अप्रैल, 2018 : क्षत्रीय ओबीसी महासभा ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि ओबीसी प्रमाण पत्र की वैधता एक साल से बढ़ाकर पांच साल की जानी चाहिए। उनका कहना है कि हर साल प्रमाण पत्र बनाने से इस वर्ग के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार पटवारी नहीं मिलता तो कभी तहसील में संबंधित अधिकारी नहीं मिलता।

30 अगस्त को को क्षत्रीय ओबीसी महासभा ने जिला अधीक्षक ऊना के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को अन्य पिछड़ा वर्ग की कुछ महत्वपूर्ण मांगों से संबंधित एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि ओबीसी प्रमाण पत्र की वै्धता अवधि केवल 1 वर्ष है जबकि वह कम से कम 5 वर्ष होनी चाहिए। इसके लिए आधार केवल आय को माना गया है जबकि पे कमीशन की रिपोर्ट 10 वर्ष में एक बार आती है, जिससे द्वितीय तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों की आय इतनी नहीं बढ़ती कि वह 8 लाख की सीमा को पार कर जाए।

जिला उपायुक्त ऊना को ज्ञापन सौंपते महासभा का प्रतिनिधिमंडल

ओबीसी से संबंधित लोग ज्यादातर किसान और तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी हैं विवाहित लडकियों  को हर बार नया प्रमाण पत्र बनवाना पड़ता है। इसके लिए उन्हें हर बार दो पटवार सर्कल दो तहसीलों में जाना पड़ता है जो कि एक मानसिक, शारीरिक वित्तीय यातना है। उन्हें सरकारी  दफ्तरों  में  कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कभीकभी पटवार खाने में पटवारी नहीं मिलते या कभी तहसीलदार नहीं होते। क्योंकि उनके पास ऑफ़िस ही नहीं फील्ड का काम होता है।

पहाड़ी इलाके में खेत को बोने लायक बनाती महिलाएं

ओबीसी महासभा ने मांग की है कि विवाहित लड़कियों के लिए स्थाई तौर पर प्रमाण पत्र जारी किया जाए। जिसमें कि उनके पिता की आय का ही ब्यौरा दिया जाता है। पड़ोसी राज्यों से विवाहित लड़कियों को तो ओबीसी श्रेणी में  भी नामांकित नहीं किया जा रहा जबकि वे अन्य पिछड़ा वर्ग की  सम्मिलित जातियों में हैं। पड़ोसी राज्यों से विवाहित लड़कियों की जानकारी निश्चित की जानी चाहिए। हर तहसील में अलगअलग मापदंड निर्धारित किए गए हैं जो कि एक ही होने चाहिए। ये चीजें अति मानसिक प्रताड़ना को बढ़ावा दे रही हैं। कभीकभी तो साक्षात्कार के समय बच्चों से पटवारी की तसदीक की प्रतिलिपि की मांग भी की जाती है जबकि अधिसूचना  कभी भी इस तरह की चीजों की मांग नहीं करता है। जिस वक्त साक्षात्कार होना है उसी समय यह सब मुहैया कराना अभ्यर्थियों के लिए नामुमकिन होता है। 

पहाड़ का संघर्षमय जीवन

बारबार की प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया से प्रशासन अभ्यर्थी दोनों पर अनावश्यक बोझ बढ़ता हैअतः प्रमाण पत्र की अवधि 1 वर्ष से बढ़ाकर कम से कम 5 वर्ष कर दिया जाए तथा विवाहित लड़कियों का प्रमाण पत्र स्थाई बनाया जाए जिससे कि अभ्यर्थियों के हो रहे मानसिक वित्तीय शोषण से बचा जा सके।

इस अवसर पर क्षत्रीय ओबीसी महासभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजीव अम्बिया सचिव रितेश पालियाल, जिला अध्यक्ष अमरजीत सिंह, कोषाध्यक्ष रोकी ग़ांधी, पूरण चंद, राजेश चौधरी, राकेश चौधरी, अनूप केसरी, गुरदास राम, भजन लाल, अमित, जीतन दिलावर चंद, चौधरी रमेश और राजकुमार आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।
  

(कॉपी संपादन : सिद्धार्थ)


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