विश्व हिंदू कांग्रेस : सामाजिक और लैंगिक असमानता पर पर्दा डालने की कवायद

हाल ही में शिकागो में आयोजित विश्व हिंदू कांग्रेस को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने वही कहा जिसके लिए उन्हें जाना जाता है। उन्होंने अल्पसंख्यकों को कीट की संज्ञा दी और धर्म निरपेक्षता में विश्वास रखने वालों को कोसा। यह सब सामाजिक और लैंगिक असमानता पर पर्दा डालने की कवायद ही है। राम पुनियानी का विश्लेषण :

दुनिया के सभी क्षेत्रों और धर्मों की तरह, भारत से भी बड़ी संख्या में हिन्दू दूसरे देशों में जाते रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण है वहां, विशेषकर पश्चिमी देशों में रोजगार के बेहतर अवसरों की उपलब्धता और अपेक्षाकृत ऊँचा जीवनस्तर। दुनिया के लगभग सभी देशों में भारतीय मूल के हिन्दू निवासरत हैं। समृद्ध देशों, जैसे इंग्लैंड, कनाडा और अमेरिका, प्रवासी भारतीयों को अधिक भाते हैं। जो भारतीय पश्चिमी देशों में बस रहे हैं, वे वहां की संस्कृति और सभ्यता में खुद को कुछ हद तक ढाल तो रहे हैं परंतु वे अपने पूर्वाग्रहों से मुक्त नहीं हो पा रहे हैं। वे अपनी भारतीयता का जश्न मनाने के लिए समारोह आयोजित करते रहते हैं। उनके कई धर्म-आधारित संगठन भी हैं।

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