दिल्ली में जुटे देश भर के ओबीसी प्रतिनिधि, आरक्षण को बचाने का लिया संकल्प

राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के बैनर तले देश भर के बहुजन बीते 26 नवम्बर 2018 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्र हुए और सरकार के संविधान विरोधी नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। फारवर्ड प्रेस की खबर :

देश भर से आए अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधियों ने बीते 26 नवम्बर 2018 को जंतर-मंतर पर शपथ लिया कि जब तक सरकार आरक्षण के विरोध में उठाए गए कदमों को वापस नहीं लेती है तब तक बहुजन देश भर में विरोधस्वरूप शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करते रहेंगे। इस मौके पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष जस्टिस वी. ईश्वरैया भी मौजूद थे। राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के बैनर तले एकत्र हुए बहुजन प्रतिनिधियों का कहना था कि सरकार जानबूझकर आरक्षण के साथ खिलवाड़ कर रही है ताकि आरक्षण खत्म करने का माहौल बनाया जा सके।

राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ की तरफ से कहा गया कि एकजुट रहने के लिए ही महासंघ का गठन किया गया है और इसके तहत संविधान व ओबीसी विरोधी किसी भी कदम का पुरजोर विरोध किया जाएगा। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. बबनराव तायवाडे के मुताबिक एकजुटता के सहारे ही हम अपनी जायज मांगें सरकार से मनवा सकते हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. बबनराव तायवाडे

उन्होंने महासंघ के पहले अधिवेशन से हाल में संपन्न हुए तीसरे अधिवेशन का सिलसिलेवार ढंग से हवाला देते हुए बताया कि महासंघ का नागपुर में 7 अगस्त 2016 को जब पहला अधिवेशन हुआ था, तब क्रीमीलेयर की सीमा 4.5 लाख से बढ़ाने की मांग की गई थी। ओबीसी समाज के लोगों की एकजुटता की वजह से महाराष्ट्र सरकार को क्रीमीलेयर की अधिकतम सीमा 4.5 लाख से बढ़ाकर 6 लाख करने के लिए अध्यादेश लाना पड़ा। महासंघ की मजबूती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 6 दिसम्बर 2016 को शीतकालीन नागपुर अधिवेशन में एक लाख से अधिक सर्वसमावेशी ओबीसी समाज के लोगों का मोर्चा निकाला गया था। ओबीसी संगठनों की एकजुटता की वजह से ही महाराष्ट्र में पहली बार ओबीसी मंत्रालय का गठन करना पड़ा।  

बहुजन विमर्श को विस्तार देतीं फारवर्ड प्रेस की पुस्तकें

महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने महासंघ के 7 अगस्त 2017 को दिल्ली में संपन्न हुए द्वितीय महाधिवेशन का हवाला देते हुए कहा कि इसकी सफलता का ही परिणाम रहा कि केंद्र सरकार को क्रीमीलेयर की अधिकतम सीमा छह लाख  से बढ़ाकर आठ लाख करनी पड़ी। इतना ही नहीं, केंद्र सरकार ने पहली बार नागपुर में 500 ओबीसी छात्रों के लिए छात्रावास बनाने की मंजूरी दी। इसी साल 7 अगस्त 2018 को महासंघ के तीसरे महाअधिवेशन की चर्चा करते हुए बताया कि इस अधिवेशन में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस पहुंचे थे और उन्होंने इस मौके पर कई घोषणाएं की। मसलन, सरकारी नौकरी में बैकलाॅग निर्धारित अवधि में पूरा किया जाएगा। इसके अलावा 19 जिलों में ओबीसी विद्यार्थियों के लिए छात्रावास बनाने, ओबीसी बच्चों के लिए विदेश जाकर उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए सरकारी सहायता देने की भी घोषणा की गई।     

संगठन के महासचिव सचिन रजुरकर ने राष्ट्रीय अध्यक्ष की बातों को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सरकार क्रीमीलेयर की बात कर बहुजन के एक बड़े वर्ग को आरक्षण का लाभ लेने से रोकना चाहती है। क्योंकि आंकड़े गवाह हैं कि आरक्षण के तहत जितनी सीटें इस वर्ग को मिलनी चाहिए थी, वो अभी तक भरी ही नहीं गई है। सरकार की मंशा ठीक नहीं लगती है क्योंकि वह क्रीमीलेयर की बात कर बहुजन में ही फूट डालने की कोशिश कर रही है। इसलिए एकजुट रहने की जरूरत है। एकजुटता की वजह से ही सरकार अपनी मंशा में सफल नहीं हो पा रही है।  उन्होंने कहा कि इसी तरह प्रमोशन में आरक्षण का मुद्दा उछालने के पीछे भी सरकार की मंशा ठीक नहीं लग रही है।

महासचिव ने बताया कि महासंघ जाति पर आधारित जनगणना की मांग कर लगातार दबाव बना रहा है और जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन उसी दबाव का हिस्सा है। क्योंकि हमें पता है कि कांग्रेस हो या फिर भाजपा की सरकार हो चुनाव के समय तो इसकी खूब बात करेंगे लेकिन चुनाव समाप्त होते ही वे भूल जाते हैं। उन्होंने कहा कि एसटी के लिए ट्राइबल वेलफेयर मिनिस्ट्री व एससी के लिए सोशल वेलफेयर मिनिस्ट्री की  तर्ज पर अलग से ओबीसी वेलफेयर मिनिस्ट्री की भी मांग रखी गई है और इन सभी मांगों का ज्ञापन प्रधानमंत्री कार्यालय को भी सौंपा गया।

(कॉपी संपादन : एफपी डेस्क)


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