किडनी नहीं कर रही काम, बिस्तर से उठ भी नहीं पा रहे लालू प्रसाद

राजद प्रमुख लालू प्रसाद की हालत दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। उनका इलाज कर रहे चिकित्सक भी मानते हैं कि यह खतरे की स्थिति है। इसके बावजूद उनका इलाज बेहतर अस्पताल में नहीं कराया जा रहा है। फारवर्ड  प्रेस की खबर :

चारा घोटाला मामले में जेल की सजा काट रहे राजद प्रमुख लालू प्रसाद की तबीयत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। जेल प्रशासन की देख-रेख में उनका इलाज झारखंड की राजधानी रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में चल रहा है। उनकी किडनी सही तरीके से काम नहीं कर रही है। मधुमेह का स्तर बहुत बढ़ा हुआ है और ब्लड प्रेशर की समस्या भी विषम हो गई है। हालत यह हो गई है कि राजद प्रमुख अब बिस्तर से उठ-बैठ भी नहीं पा रहे हैं। बदन में सूजन बढ़ती जा रही है।

जहां एक ओर उनकी सेहत बिगड़ती जा रही है और चिकित्सकों के द्वारा स्थिति गंभीर बताए जाने के बावजूद उनका इलाज किसी दूसरे अस्पताल में कराए जाने को लेकर जेल प्रशासन कोई प्रयास नहीं कर रहा है। बताते चलें कि दो वर्ष पहले ही लालू प्रसाद की बाईपास सर्जरी हुई थी और हृदय में कृत्रिम वाल्व लगाया गया था।

रांची के रिम्स में इलाजरत अपने पिता से मिलने गए तेजस्वी यादव

बीते दिनों बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता व लालू प्रसाद के पुत्र तेजस्वी यादव अपने पिता को देखने रांची गए थे। उन्होंने इलाज में कोताही बरतने का आरोप लगाया था।

लालू प्रसाद के सहयोगी व राजद विधायक भोला यादव ने फारवर्ड प्रेस को दूरभाष पर उनके गिरते स्वास्थ्य के बारे में बताया। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक अस्पताल के चिकित्सकों के द्वारा बाहर इलाज कराने के बारे में नहीं कहा जाएगा, तब तक हम अदालत में बेहतर इलाज के लिए जमानत हेतु अपील नहीं कर सकते हैं। इसलिए हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं। जैसे ही अस्पताल प्रशासन इस बारे में सूचित करेगा, हम लोग कहीं और इलाज हेतु अदालत में अपील करेंगे।

वहीं रिम्स अस्पताल में लालू प्रसाद का इलाज कर रहे डा. उमेश सिंह ने 16 अक्टूबर को इस बात की जानकारी दी कि राजद प्रमुख का किडनी पूरी तरह काम नहीं कर रही है। यह खतरे की स्थिति है।

अपने पिता के साथ राज्यसभा सांसद डा. मीसा भारती

जबकि, लालू प्रसाद की बड़ी बेटी व राज्यसभा सांसद डा. मीसा भारती ने कहा, “जेल प्रशासन की देख-रेख में कैसा इलाज किया जा रहा है, इस बारे में हमें कोई जानकारी नहीं दी जाती है। यहां तक कि हमें सप्ताह में एक दिन ही मिलने का समय दिया जाता है। ऐसे समय में जबकि आवश्यकता इस बात की है कि एक परिजन उनके पास हमेशा रहे, ताकि वह उनका पूरा ध्यान रख सके। लेकिन, सरकार जेल मैनुअल का हवाला देकर हमें अपने पिता की देखभाल करने नहीं दे रही है।”

(कॉपी संपादन : प्रेम/सिद्धार्थ)


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