जामिया में ‘जाति और संचार’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 27 मार्च से

मीडिया और जाति के सवाल पर आगामी 27-28 मार्च 2019 को देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान जामिया मिल्लिया इस्लामिया में राष्ट्रीय सम्मेलन होने जा रहा है। इसके लिए शोधार्थियों से शोध पत्र आमंत्रित किए गए हैं

आगामी 27 और 28 मार्च 2019 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन सेंटर फॉर कल्चर मीडिया एंड गवर्नेस और अखिल भारतीय संचार और मीडिया एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में होगा। इसका विषय ‘जाति और संचार’ रखा गया है। इसके लिए शोधार्थियों से इस विषय पर शोध पत्र आमंत्रित किए गए हैं। चयनित शोध पत्रों को प्रकाशित किया जाएगा।

आयोजकों द्वारा जारी सूचना के अनुसार शोधार्थियों से निर्धारित विषय पर या फिर इससे संबंधित विषयों पर अपने शोध पत्र के मूल दस्तावेज को ईमेल के जरिए भेजने को कहा गया है। सम्मेलन के लिए जो विषय तय किए गए हैं, उनमें ‘जाति-साक्षरता और सामाजिक व्यवस्था’, ‘जाति-लिंग और समाज’, ‘जाति-वर्ग और संचार’, ‘जाति और लोकप्रिय संस्कृति’, ‘जाति और मीडिया प्रस्तुति’, ‘जाति और मीडिया संगठन’, ‘जाति-पहचान और संचार’, ‘जाति-संचार और सामाजिक आंदोलन’ शामिल हैं।

  • 31 दिसंबर 2018 तक शोधार्थी जमा कर सकेंगे अपने शोध पत्र का सार

  • चयनित शोधार्थियों को 28 फरवरी 2019 तक जमा करना होगा पूर्ण शोध पत्र

सम्मेलन में अपना शोध प्रस्तुत करने के इच्छुक शोधार्थियों को 31 दिसम्बर 2018 तक ‘जाति और संचार’ विषय से संबंधित उपरोक्त टॉपिक पर 500 शब्दों में सार लिखकर भेजना होगा और उसके आधार पर ही चयनित शोधार्थियों की सूची 7 जनवरी 2019 को जारी की जाएगी और 28 फरवरी 2019 तक उन सबों को पूर्ण शोध पत्र जमा करना होगा। शोध पत्र की शब्द सीमा 5,000 से 7,000 के बीच होनी चाहिए। शोध पत्र के सार व पूर्ण शोध पत्र दोनों ccmg@jmi.ac.in पर ई-मेल के जरिए तय तिथि तक भेजनी है। इस सिलसिले में किसी भी तरह की परेशानी हो रही हो तो मोबाइल नम्बर 9654621778 पर संपर्क करने का विकल्प भी दिया गया है।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली

आयोजन के संबंध में सेंटर फॉर कल्चर मीडिया एंड गवर्नेंस की असिस्टेंट प्रोफेसर कुसुम लता ने कहा कि मीडिया अध्ययन और संचार अध्ययन के क्षेत्र में कठोर सैद्धांतिक हस्तक्षेप की कमी है। सेंटर फॉर कल्चर-मीडिया एंड गवर्नेंस जिसे सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन कम्युनिकेशन स्टडीज के रूप में भी जाना जाता है, वह मीडिया और कम्युनिकेशन स्टडीज को व्यापक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सामाजिक संबंधों में मीडिया के तौर-तरीके और जमीनी मीडिया के अनुसंधान से परे जाने की गंभीर जरूरत है क्योंकि मीडिया और संचार अध्ययन तकनीकी निर्धारण के जाल में पड़ जाते हैं, जिससे सामाजिक संबंध अलग हो जाते हैं। इस पृष्ठभूमि में ही यह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।

(कॉपी संपादन : एफपी डेस्क)


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