दिल्ली के स्कूलों में चलेगी सफाई की पाठशाला

दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के मुताबिक दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ सफाई भी करेंगे। यह उनके पाठ्यक्रम में शामिल होगा

दिल्ली सरकार अपने स्कूलों में सफाई को लेकर एक पाठ्यक्रम चलाएगी। दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इससे बच्चे अपने स्कूलों की साफ-सफाई में भागीदार बन सकेंगे और उनके अंदर साफ-सफाई करने की आदत भी विकसित होगी।

शिक्षा मंत्री के मुताबिक अभी तक जो मॉडल है, उसमें स्कूलों में जो भी गन्दगी होती है, जो भी कूड़ा-करकट फैलता है, उसमें बच्चे भी भागीदार होते हैं लेकिन साफ-सफाई में उनकी भागीदारी नहीं होती। हर स्कूल में तकरीबन तीन से चार हज़ार बच्चे आते हैं। टीचर्स आते हैं। गंदगी फैलती है या धूल होती है। इस सबको साफ़ करने के लिए अलग से सफ़ाई कर्मचारी होते हैं लेकिन बच्चों के ऊपर साफ-सफाई को लेकर कोई जवाबदेही नहीं होती। हम चाहते हैं कि बच्चों के भीतर साफ-सफाई रखने के साथ-साथ साफ-सफाई करने की भी प्रवृत्ति विकसित हो। एक बार उन्हें स्कूल में साफ-सफाई करने की आदत बन जाएगी, तो वे अपने घर में और अपने आस-पास भी इस प्रवृत्ति को अमल में लाएंगे। इसी उद्देश्य से यह पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा।

मनीष सिसोदिया, उप-मुख्यमंत्री सह शिक्षा मंत्री, दिल्ली सरकार

मनीष सिसोदिया ने यह भी कहा कि अगर हमें ये लगता है कि किताबों में सफाई के बारे में पढ़ाने और स्वच्छ भारत अभियान चलाने से ये सब ठीक हो जाएगा, तो यकीन मानिए कभी भी, कुछ भी ठीक नहीं होगा। मैंने दुनिया के कई देशों में ऐसा मॉडल देखा है जहां बच्चे अपने स्कूलों में साफ़-सफ़ाई में पूरी तरह से भागीदारी करते हैं। झाड़ू-पोछा लगाने, डेस्क की धूल साफ करने, पेड़-पौधों को पानी देने तक के काम में अपनी भूमिका निभाते हैं लेकिन उनसे ये सब काम व्यवस्थित तरीके से कराया जाता है जिससे उनके अंदर साफ-सफाई को लेकर एक अलग तरह की जागरूकता पैदा होती है। उनसे ये सब काम यूं ही, बिना कुछ सोचे-समझे नहीं करवाया जाता। हम चाहते हैं कि दिल्ली के स्कूलों में भी यहां के हिसाब से कोई मॉडल विकसित हो।

दिल्ली में एक सरकारी स्कूल की तस्वीर

शिक्षा मंत्री ने कहा कि इसका पाठ्यक्रम एक्टिविटी पर आधारित होगा। इसके लिए अलग से कोई पीरियड नहीं होगा। अलग से कोई किताब नहीं होगी। मैंने दिल्ली के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और बच्चों से इस बारे में सुझाव मांगा है। सुझाव में यह भी बताना है कि इस पाठ्यक्रम को विकसित करने में क्या-क्या गतिविधियां शामिल की जानी चाहिए और क्या-क्या गतिविधियां शामिल नहीं की जानी चाहिए।

(कॉपी संपादन : एफपी डेस्क)


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