फेलोशिप वृद्धि : हर्षवर्द्धन ने भी दिया आश्वासन, अब जावड़ेकर से उम्मीद

रिसर्च स्कॉलरों ने 24 दिसंबर को केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन से मुलाकात की और उन्हें एकबार फिर आश्वासन ही मिला। अब उनकी उम्मीदें केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर पर टिकी हैं

देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों के रिसर्च स्कॉलर्स फेलोशिप में वृद्धि को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। 24 दिसंबर 2018 को रिसर्च स्कॉलरों ने केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री डा. हर्षवर्द्धन से मुलाकात की और उन्हें मांगों से रू-ब-रू कराया। इसके आलोक में उन्हें मंत्री द्वारा आश्वस्त किया गया कि सरकार जल्द ही इस मामले में ठोस पहल करेगी। हालांकि यह पहला अवसर नहीं है जब रिसर्च स्कॉलरों को आश्वासन दिया गया है। इसके पहले बीते 10 दिसंबर और 19 दिसंबर को भी क्रमश: भारत सरकार के प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर के. विजय राघवन और विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रधान सचिव प्रो. आशुतोष शर्मा द्वारा ट्विटर के जरिए आश्वासन दिया गया था।

इस संबंध में यंग साइंटिस्ट सोसायटी के संयोजक लालचंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि अब उनलोगों की उम्मीदें केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री द्वारा 24 दिसंबर की शाम में मुलाकात का समय दिया गया है।

बताते चलें कि बीते दो महीने से देश भर के रिसर्च स्कॉलर आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रत्येक चार साल पर फेलोशिप की राशि बढ़ाने की व्यवस्था रही है। लेकिन हर बार शोधार्थियों को आंदोलन करना पड़ता है तब जाकर सरकार फेलोशिप की राशि बढ़ाती है। इसबार भी यही हो रहा है।

केंद्रीय मंत्री डा. हर्षवर्द्धन से मिलकर ज्ञापन सौंपते रिसर्च स्कॉलर्स

नेशनल रिप्रजेंटेटिव एंड कॉर्डिनेटर ऑफ रिसर्च स्कॉलर्स ऑफ इंडिया के संयोजक निखिल गुप्ता के मुताबिक उनलोगों ने 20 नवंबर 2018 को ही के. विजय राघवन से मुलाकात कर फेलोशिप की राशि बढ़ाने की मांग की थी और तब उन्होंने आश्वस्त किया था कि दिसंबर महीने में फेलोशिप की राशि में यथोचित वृद्धि कर दी जाएगी। परंतु ऐसा नहीं हुआ।

निखिल गुप्ता के अनुसार, “ रिसर्च स्कॉलरों में सरकार के रवैए से निराशा बढ़ती जा रही है। जब सरकार हमें सम्मानजनक सुविधाएं देने को तैयार नहीं है तब हमारे पास विदेश जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।”

वहीं लालचंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि यदि सरकार ने 31 दिसंबर तक फेलोशिप में वृद्धि की घोषणा नहीं की तब 31 दिसंबर को देश भर के रिसर्च स्कॉलर्स के संगठनों के प्रतिनिधि बैठक करेंगे और आगामी 7 जनवरी 2019 को मंत्रालय के समक्ष विशाल प्रदर्शन करेंगे।

(कॉपी संपादन : एफपी डेस्क)


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +917827427311, ईमेल : info@forwardmagazine.in

फारवर्ड प्रेस की किताबें किंडल पर प्रिंट की तुलना में सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। कृपया इन लिंकों पर देखें 

 

बहुजन साहित्य की प्रस्तावना 

दलित पैंथर्स : एन ऑथरेटिव हिस्ट्री : लेखक : जेवी पवार 

महिषासुर एक जननायक’

महिषासुर : मिथक व परंपराए

जाति के प्रश्न पर कबी

चिंतन के जन सरोका

About The Author

Reply