बंद होगा भास्कर का अंग्रेजी अखबार : पौने पांच सौ करोड़ के मुनाफा पर साढे चार करोड़ का घाटा भारी!

पिछले वित्तीय वर्ष में भास्कर समूह का शुद्ध लाभ 489 करोड़ रुपए था। इसके बावजूद भोपाल से प्रकाशित डीबी पोस्ट को यह कहकर बंद किया जा रहा है कि उसे साढ़े चार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है

पारिवारिक विवाद के कारण बंद हो डीबी पोस्ट, कर्मियों का भविष्य अधर में

दैनिक भास्कर समाचारपत्र समूह ने भोपाल से प्रकाशित अपने अंग्रेजी दैनिक डीबी पोस्ट का प्रकाशन बंद करने का निर्णय लिया है। मार्च 2016 में शुरू किये इस अख़बार का आखिरी अंक 6 जनवरी 2019 को प्रकाशित होगा। अचानक लिए गए इस निर्णय से समाचारपत्र के लगभग 60 पत्रकार व गैर-पत्रकार कर्मियों का भविष्य अधर में लटक गया है। बताया जा रहा है कि ऐसा भास्कर समूह के मालिकों के बीच आपसी विवाद के कारण किया गया है।

पिछले वर्ष 489 करोड़ का शुद्ध लाभ, अब कह रहे 4.5 करोड़ रुपए का घाटा

हालांकि भास्कर समूह के प्रबंधन ने अधिकारिक रूप से इस निर्णय का कोई कारण नहीं बताया है, तथापि बताया जा रहा है कि अख़बार के निरंतर घाटे में चलने के कारण ऐसा किया गया है। कहा जा रहा है कि डीबी पोस्ट के कारण, समूह को लगभग 4.5 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का घाटा हो रहा था। वहीं यह तर्क गले से उतरने लायक नहीं है। भास्कर समूह देश के 12 राज्यों से हिंदी, मराठी और गुजराती भाषाओं में 66  संस्करण प्रकाशित कर रहा है और उसका दावा है कि समूह के समाचारपत्रों की कुल प्रसार संख्या, देश के किसी भी अन्य समाचारपत्र समूह से अधिक है। यह भी उल्लेखनीय है कि 31 मार्च 2018 को जारी अपने वार्षिक रिपोर्ट में समूल के द्वारा कुल 3,228 करोड़ रुपए का टर्नओवर और 489 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ बताया गया है।[1] ऐसे में केवल 4.5 करोड़ रुपए के नुकसान के कारण प्रकाशन का बंद किया जाना कई सवाल खड़े करता है।

दैनिक भास्कर समूह द्वारा 31 मार्च 2018 को जारी बैलेंस शीट। इस शीट में दिखाया गया है कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में समूह को 4890 मिलियन यानी 489 करोड़ रुपए का लाभ प्राप्त हुआ। इस बैलेंस शीट को दिए गए चित्र पर क्लिक करके भास्कर समूह के अधिकारिक वेबसाइट पर देखा जा सकता है

चर्चा में है पारिवारिक विवाद

जाहिर तौर पर प्रिंट मीडिया में इतना व्यापक अनुभव रखने वाले समूह के कर्ताधर्ताओं को यह तो पता होगा ही कि समाचारपत्रों को मुनाफा कमाने की स्थिति में आने में कुछ वक्त लगता है। इस निर्णय को, भास्कर समूह के मुखिया रमेशचंद्र अग्रवाल की अप्रैल 2017 में अचानक मृत्यु के बाद, परिवार में संपत्ति को लेकर शुरू हुए हुए विवादों से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। डीबी पोस्ट का संचालन, समूह के प्रबंध संचालक और रमेशचंद्र अग्रवाल के ज्येष्ठ पुत्र सुधीर अग्रवाल की पत्नी ज्योति अग्रवाल द्वारा किया जा रहा था।

डीबी पोस्ट, 24 दिसंबर 2018 का प्रथम पृष्ठ

बताते चलें कि डीबी पोस्ट, दैनिक भास्कर समूह का अंग्रेजी समाचारपत्र उद्योग में प्रवेश करने का तीसरा असफल प्रयास है। इसके पहले, इस समूह ने नेशनल मेल और फिर डीएनए नाम से अंग्रेजी दैनिकों का प्रकाशन शुरू किया था। दोनों ने कुछ ही वर्षों में दम तोड़ दिया था।

कर्मियों को दिया जा रहा दिलासा

हालांकि अखबार के कर्मचारियों को दैनिक भास्कर में ‘एडजस्ट’ करने का आश्वासन दिया गया है परन्तु इसके लिए उन्हें देश में कहीं भी जाने के लिए तैयार रहना होगा। साफ़ है कि यह सभी के लिए संभव नहीं होगा। दूसरे, समाचारपत्र के कई पत्रकार कर्मियों का हिंदी भाषा का ज्ञान सीमित है और वे हिंदी समाचारपत्र में काम करने की स्थिति में नहीं हैं।

 प्रबंधन की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जो कर्मचारी भास्कर में ‘एडजस्ट’ होने का विकल्प स्वीकार नहीं करेंगे, उन्हें किस दर से मुआवजा दिया जायेगा। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें बतौर मुआवजा कम-से-कम तीन माह का वेतन दिया जाय।

बहरहाल, डीबी पोस्ट का बंद होना, पत्रकार समुदाय के लिए दुखद खबर और प्रिंट मीडिया में रोज़गार के सिकुड़ते अवसरों का द्योतक है। अभी हाल ही में बिहार की राजधानी पटना से प्रकाशित होने वाले अंग्रेजी दैनिक टेलीग्राफ को बंद कर दिया गया। इसके पहले लगभग दो वर्ष पूर्व, हिंदुस्तान टाइम्स समूह ने भोपाल सहित देश के कई शहरों से अपने दैनिकों का प्रकाशन बंद किया था।   

(कॉपी संपादन : एफपी डेस्क)

[1] https://storage.googleapis.com/webimages.dbcorp.in/investor/Annual%20Report%202017-18.pdf


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