13 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम से भर्ती के खिलाफ लामबंद होने लगे राजनेता, सांसद, शिक्षक

विश्वविद्यालयों में रोस्टर सिस्टम के जरिए भर्ती होगी। इससे आरक्षित वर्ग के होनहार छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। विश्वविद्यालयों में शिक्षक-नियुक्तियों में 200 प्वाइंट पोस्ट बेस रोस्टर की बहाली की मांग को लेकर शिक्षक, राजनेता लामबंद होने शुरू हो गए हैं। दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन जारी है। फारवर्ड प्रेस की रिपोर्ट :

एससी-एसटी एक्ट की तर्ज पर अध्यादेश लाकर विश्वविद्यालयों में रोस्टर सिस्टम से होने वाली भर्ती पर रोक लगाए केंद्र सरकार

विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्तियों में 200 प्वाइंट पोस्ट बेस रोस्टर की बहाली की मांग को लेकर शिक्षक, राजनेता लामबंद होने शुरू हो गए हैं। दिल्ली में इसको लेकर लगातार चार दिन से कैंडल मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है, वहीं देश के अन्य हिस्सों से भी इसी तरह के विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी सरकार के उस निर्णय की कटु आलोचना कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने सरकारी वकील के जरिए सुप्रीम कोर्ट में रोस्टर पर सही से अपना पक्ष नहीं रखा, जिससे उनके द्वारा दायर एसएलपी को कोर्ट ने खारिज कर दिया। विरोध करने वालों को सैद्धांतिक रूप से कई राजनेताओं व शिक्षक संगठनों का भी साथ मिल रहा है।


केंद्र में मोदी सरकार की सहयोगी पार्टी अपना दल (एस) भी इससे नाराज है, वहीं भाजपा छोड़ चुकी सांसद सावित्री बाई फूले भी मोदी सरकार को इसके लिए जिम्मेदार मान रही हैं। उनका कहना है कि जब अदालत में जानबूझकर कमजोर तर्क रखा जाएगा, तो ऐसा हश्र होना स्वाभाविक है, लेकिन बहुजन इससे हारने वाले नहीं है। यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं कि बहुजनों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन इनके पांच साल के कार्यकाल में सब जाती रहीं। यही सब देखकर उन्होंने बीजेपी छोड़ी, ताकि बहुजनों के लिए लड़ाई जारी रखी जा सकें।

रोस्टर सिस्टम के खिलाफ कैंडल मार्च निकालते शिक्षक

आरक्षित वर्ग के प्रोफेसर की संख्या और कम हो जाएगी : अपना दल

केंद्र सरकार में सहयोगी पार्टी के रूप में शामिल अपना दल (एस) भी 13 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम लागू किए जाने से खुश नहीं है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एससी-एसटी एक्ट की तर्ज पर विश्वविद्यालयों में रोस्टर सिस्टम के जरिए होने वाली भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए तत्काल अध्यादेश लाने की मांग की है।

अपना दल (एस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष पटेल

अपना दल (एस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष पटेल के मुताबिक, विश्वविद्यालयों में रोस्टर सिस्टम के जरिए भर्ती होने से आरक्षित वर्ग के होनहार छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले ही देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षित वर्ग के लोगों की संख्या नाम-मात्र की है। ऐसे में यदि रोस्टर सिस्टम के जरिए प्रोफेसर की भर्ती की जाती है, तो आने वाले समय में उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षित वर्ग के प्रोफेसर की संख्या और कम हो जाएगी।

आशीष पटेल के मुताबिक, रोस्टर सिस्टम मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा पिछले सप्ताह याचिका खारिज करने के बाद पिछड़ों और एससी-एसटी वर्ग में एक गलत संदेश जा रहा है। समाज के निचले तबके में यह भी संदेश जा रहा है कि सरकारी वकील ने माननीय उच्चतम न्यायालय के सामने रोस्टर सिस्टम को सही ढंग से नहीं रखा। जबकि बता दें कि जुलाई महीने में मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक एवं एनडीए की बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने रोस्टर सिस्टम पर रोक लगाने के लिए आवाज उठाई थी। केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की मांग पर केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय के निर्णय तक रोस्टर सिस्टम से भर्ती पर रोक लगा दी थी। लेकिन पिछले सप्ताह उच्चतम न्यायालय द्वारा इस मामले में याचिका खारिज कर दी गई। अत: अब रोस्टर सिस्टम से होने वाली भर्ती पर रोक लगाने के लिए अध्यादेश ही अंतिम सहारा है।

रोस्टर सिस्टम के खिलाफ प्रदर्शन करते शिक्षक

यूनिवर्सिटी में खत्म हो जाएगा एससी-एसटी, ओबीसी का कोटा -फूले

हाल ही में भाजपा छोड़ने वाली सांसद सावित्री बाई फूले भी 13 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम को लेकर काफी मुखर हैं। उनका साफ कहना है कि विश्वविद्यालयों में दलित, पिछड़े और आदिवासियों के आरक्षण के मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब नया संकट खड़ा हो गया है। अब शायद किसी विश्वविद्यालय में उपलब्ध कुल पदों के अनुसार सीटें आरक्षित नहीं होंगी। इसका असर पूरे देश के विश्वविद्यालयों पर पड़ेगा और जो आरक्षित वर्ग के शिक्षक वर्षों से एडहॉक शिक्षक के रूप में पढ़ाते आ रहे हैं, उनके समक्ष भी रोजी-रोटी तक का संकट उत्पन्न हो जाएगा, क्योंकि इन एडहॉक असिसटेंट प्रोफेसर की नियुक्तियां हर चार महीने पर की जानी होती हैं। लेकिन अब जो नियुक्तियां होंगी वे यूजीसी के आरक्षण से जुड़े नए नियम के तहत होंगी। इसमें यह आशंका है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दलितों, पिछड़ों और आदिवासी तबकों के लिए कोटा प्रणाली के तहत आरक्षित शिक्षण पदों को लगभग समाप्त कर दिया जाएगा।

सांसद सावित्री बाई फुले

सांसद का साफ कहना है कि 13 प्वाइंट वाली रोस्टर व्यवस्था दोषपूर्ण है और इससे बहुजन की हकमारी होगी। बता दें कि पहले 200 प्वाइंट वाली रोस्टर व्यवस्था थी और तब विश्वविद्यालय स्तर पर आरक्षण लागू होता था, लेकिन 13 प्वाइंट सिस्टम के तहत अब विभाग या विषय के स्तर पर आरक्षण व्यवस्था लागू होगी। अब जैसे ही यूजीसी का नया 13 प्वाइंट वाला रोस्टर सिस्टम लागू होगा, इन वर्गों का आरक्षण समाप्त हो जाएगा और ये सड़क पर होंगे।

हकमारी किस तरह होगी, इसे समझने के लिए मौजूदा और नई रोस्टर व्यवस्था को समझना होगा। अभी तक 200 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम विश्वविद्यालय स्तर पर लागू थी, लेकिन नए आदेश के तहत 13 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम लागू हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि रोस्टर आरक्षण व्यवस्था में यह तय होता है कि कौन-से पद किस श्रेणी में रखे जाएंगे। 200 प्वाइंट रोस्टर का अर्थ है कि 200 पद तक रोस्टर क्रमवार चलेगा, उसके बाद फिर 01 से शुरू होकर 200 पद तक जाएगा। इसमें आरक्षण प्रावधान के अनुपात में पद तय होते हैं; जैसे- सामान्य या अनारक्षित- 50.5%, ओबीसी- 27%, एससी- 15%, एसटी- 7.5%। इसी अनुपात में पद भी तय होते हैं।
200 प्वाइंट में पद इस तरह तय होते हैं। इसमें सबसे पहले विश्वविद्यालय को इकाई माना जाता है। उस विश्वविद्यालय के सभी विषयों को ए से जेड तक के सभी पदों को एक साथ 200 तक जोड़ लिया जाता है। तो क्रम के अनुसार पहले 4 पद सामान्य, फिर ओबीसी, फिर एससी/एसटी इत्यादि के लिए पद होंगे। इस व्यवस्था में सामान्य पदों की जगह आरक्षित पदों से भी नियुक्तियों की शुरुआत हो सकती है। और अगर किसी श्रेणी में नियुक्ति नहीं होती है, तो उस पद को बाद में, बैकलॉग के आधार पर भरा जा सकता है। इस हिसाब से 200 प्वाइंट रोस्टर फॉर्मूले में क्रमवार सभी तबकों के लिए पद 200 नंबर तक तय हो जाते हैं। लेकिन, 13 प्वाइंट रोस्टर में ऐसा नहीं है।

13 प्वाइंट रोस्टर के तहत नियुक्तियां विभाग/विषय स्तर पर होंगी। इसमें 14 पदों के बाद दोबारा एक नंबर से रोस्टर शुरू होगा। इसमें सबसे पहले तीन पद अनारक्षित होंगे। उसके बाद चौथा पद ओबीसी होगा। फिर 5 और 6 नंबर का पद अनारक्षित है। 7 नंबर का पद दलित यानी एससी का है। 8वां पद ओबीसी का है। 9, 10 और 11 नंबर का पद अनारक्षित है। 12 नंबर का पद ओबीसी का है। 13वां पर फिर अनारक्षित हो जाएगा। लेकिन देश के किसी भी कॉलेज या विश्वविद्यालय में 14 सीटें कभी भी नहीं आएंगी। जब भी विभाग में पद ज्ञापित होगा तो 1 या 2 या 3 या 4 या 5 या 6 पद ही ज्ञापित होंगे। ऐसे में 14वें नंबर का पद आदिवासी यानी एसटी के लिए रिज़र्व होना चाहिए, जो आएगा ही नहीं, इस हिसाब से 200 प्वाइंट रोस्टर फॉर्मूले में क्रमवार सभी तबकों के लिए पद 200 नंबर तक तय हो जाते हैं। लेकिन 13 प्वाइंट रोस्टर में ऐसा नहीं है। क्योंकि 13 पदों के बाद फिर 1 नंबर से गिनती शुरू हो जाएगी।

इससे दलित-पिछड़ों-आदिवासियों की बारी नहीं आएगी। विषयवार नियुक्तियां करने में एक और दिक्कत है। चूंकि किसी भी विषय में 1, 2, 3 से अधिक पद नहीं होते हैं, इससे हर बार सामान्य वर्ग के उम्मीदवार की ही नियुक्ति होगी। ऐसे में दलित-पिछड़ों-आदिवासियों का नंबर ही नहीं आएगा। चूंकि बैकलॉग का प्रावधान नहीं है, तो हर बार नियुक्ति सामान्य वर्ग से ही होगी। इससे आरक्षण की मूल भावना और प्रतिनिधित्व के सिद्धांत का हनन होता है। सामाजिक न्याय प्राप्त करने की दिशा में यह एक बड़ा रोड़ा है। इसलिए विषयवार या विभागवार नियुक्तियों की जगह कॉलेजों और विश्वविद्यालय को इकाई मानते हुए व्यवस्था को लागू किया जाना चाहिए।

डीयू के शिक्षक भी हैं खफा

दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आदित्य मिश्र ने कहा कि डीयू में एडहॉक शिक्षकों के लिए स्थाई करने का एक ही रास्ता समायोजन का बचता है। उनका कहना है कि नया रोस्टर कब बनेगा, पोस्ट किसकी होगी यह सब अभी तय नहीं है, ऐसे में 200 प्वाइंट रोस्टर लागू करते हुए इनका समायोजन ही एक विकल्प है।
वहीं डूटा के मौजूदा अध्यक्ष डॉ. राजीव रे का कहना है कि वे हमेशा एडहॉक शिक्षकों के मुद्दे को लेकर चले हैं और 200 प्वाइंट रोस्टर और परमानेंट अपॉइंटमेंट्स की मांग डूटा के मांग पत्र में सदैव रही है।

(कॉपी संपादन : प्रेम बरेलवी)


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