सवर्ण आरक्षण : हरकत में आया यूजीसी, विश्वविद्यालयों को भेजा सर्कुलर

यूजीसी ने देश के सभी विश्वविद्यालयों, केंद्रीय विश्वविद्यालयों, पूर्ण वित्त पोषित, मानद विश्वविद्यालयों व दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राचार्यों को भेजे अपने सर्कुलर में साफ कहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्ष्ण देने के लिए संविधान के 103 वें संशोधन अधिनियम के अनुसार आरक्षण नीति त्वरित गति से लागू करें

नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण के फैसले को जमीन पर उतारने को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) सक्रिय हो गया है। यूजीसी के संयुक्त सचिव की तरफ से देश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों और कॉलेजों के प्राचार्यों को एक सर्कुलर भेजा गया है जिसमें शैक्षणिक संस्थानों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्र-छात्राओं के प्रवेश के संदर्भ में लिखा है। इस सर्कुलर में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को देश के सभी विश्वविद्यालयों, केंद्रीय विश्वविद्यालयों, पूर्ण वित्त पोषित, मानद विश्वविद्यालयों व दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राचार्यों को संबोधित करते हुए कहा गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सभी केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में संविधान के 103 वें संशोधन अधिनियम के अनुसार आरक्षण नीति त्वरित गति से लागू करें।

यूजीसी के इस सर्कुलर में विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष व हर कॉलेज के प्राचार्य से सीटों और कर्मचारियों का ब्यौरा मांगा गया है और साथ ही आरक्षण लागू करने के बाद आगामी शैक्षिक सत्र में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की कितनी सीटों की बढ़ोतरी होंगी, इस बारे में भी बताने को कहा गया है। आगामी शैक्षिक सत्र 2019-20 से लागू करने के लिए हर कॉलेज/संस्थान की वेबसाइट पर इस आरक्षण की नीति को लागू करने के संदर्भ में स्पष्ट रूप से उल्लेख करने के भी निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त संभावित वित्तीय आवश्यकताओं के बारे में 31 जनवरी 2019 से पहले यूजीसी को सूचित करने के लिए कहा गया है।

  • आगामी शैक्षणिक सत्र से बढेंगी 25 फीसदी सीटें

  • हर वर्ग के छात्र होंगे लाभान्वित

  • 31 जनवरी से पहले यूजीसी को करना होगा सूचित

  • छात्रों की सीटें बढ़ने से शिक्षकों व कर्मचारियों के पदों पर भी होगी अधिक नियुक्तियां

माना जा रहा है कि यूजीसी के इस सर्कुलर आ जाने से आगामी शैक्षिक सत्र 2019-20 से विभिन्न विभागों/विषयों में 25 फीसदी सीटें बढ़ जाएंगी। इन सीटों के बढ़ने से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के साथ-साथ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, ओबीसी के अलावा सामान्य वर्गों के विद्यार्थियों की सीटों में इजाफा होगा। बता दें कि डीयू में यह दूसरा अवसर है जब विद्यार्थियों की सीटों में बढ़ोतरी हो रही है। इससे पहले 2007 में ओबीसी आरक्षण लागू होने पर छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सीटें बढ़ी थीं और केंद्र सरकार ने शिक्षकों की नियुक्ति के पहले ट्रेंच में लगभग 1300 पद दिए थे। इसी तरह से ओबीसी कर्मचारियों की सीटों में इजाफा हुआ था।

यूजीसी, नई दिल्ली

दिल्ली विश्वविद्यालय के एकेडमिक काउंसिल के सदस्य प्रो. सुमन के मुताबिक पिछले साल दिल्ली विश्वविद्यालय की अंडरग्रेजुएट कोर्सेज में मान्य सीटें 58,598 थीं जिनमें से प्रवेश दिया गया था 70,637 छात्रों को। इनमें सामान्य छात्र 41,514 , ओबीसी 16,134 , एससी 9,474, एसटी 2,714, पीडब्ल्यूडी वर्ग के 801 छात्र थे। उनके अनुसार यदि आगामी शैक्षिक सत्र से सीटें बढ़ती है तो सामान्य वर्गो के छात्र 35, 671, ओबीसी 19,072 , एससी 10,596, एसटी 5,298 आदि सीटों का इजाफा होगा।

प्रो. हंसराज सुमन, सदस्य, एकेडमिक काउंसिल, दिल्ली विश्वविद्यालय

प्रो. सुमन ने डीयू के एक कॉलेज अरबिंदो कॉलेज का उदाहरण देते हुए बताया है कि आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों की सीटों के बढ़ने से उनके कॉलेज में इस प्रकार सीटें बढ़ेंगी।उनके अनुसार बीए प्रोग्राम में अभी स्वीकृत सीटें 308 हैं जो बढ़ने पर 385 सीटें हो जाएंगी। इसी तरह बीए ऑनर्स इंग्लिश की स्वीकृत सीटें 46 से बढ़कर 58 , बीए ऑनर्स हिंदी की स्वीकृत सीटें 46 बढ़कर 58 ,बीए ऑनर्स पॉलिटिकल साइंस की स्वीकृत सीटें 62 से बढ़कर 78 हो जाएंगी। इसी तरह से बीकॉम प्रोग्राम की स्वीकृत सीटें 277 से बढ़कर 346, बीकॉम ऑनर्स की स्वीकृत सीटें 62 से बढ़कर 78 , बीएससी फिजिकल साइंस की स्वीकृत सीटें 92 से बढ़कर 115, बीएससी लाइफ साइंस की स्वीकृत सीटें 46 से बढ़कर 58 ,बीएससी इलेक्ट्रॉनिक ऑनर्स की स्वीकृत सीट 31 से बढ़कर 39 हो जाएंगी। इस तरह से अरबिंदो कॉलेज में स्वीकृत सीटें अभी जहां कुल 970 है और जब आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू होने की स्थिति में कॉलेज की कुल सीटें 1215 हो जाएंगी। इसी तरह से जिस प्रकार से विभागों और कॉलेजों में छात्रों के प्रवेश की सीटें बढ़ेंगी ठीक उसी तरह से डीयू के विभिन्न विभागों में जहां अभी कुल 2000 शिक्षक हैं वहां 25 प्रतिशत सीटें बढ़ने पर 500 शिक्षकों की और जरूरत होंगी। इसी तरह से कॉलेजों में जहां 10,000 शिक्षक हैं, 25 फीसदी सीटें बढ़ने के बाद 2500 पदों पर नये शिक्षकों की जरूरत होगी।

(कॉपी संपादन : एफपी डेस्क)


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