सुनपेड़ कांड : क्या दलित पिता ने अपने दुधमुँहे बच्चों को जिंदा जलाया था?

तीन वर्षों से चल रही जांच के बाद सीबीआई ने सभी 12 सवर्ण आरोपियों को क्लीन चिट दे दिया है। सवाल उठता है कि अपने दो मासूम बच्चों को जिंदा जला देने वाला उनका पिता ही था? सवाल सीबीआई की जांच पर भी उठता है

सीबीआई ने दी सभी आरोपियों को क्लीन चिट

बहुचर्चित सुनपेड़ अग्निकांड मामले में बीते बुधवार (16 जनवरी 2019) को हरियाणा के पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान सीबीआई ने मामले की क्लोजर रिपोर्ट अदालत के समक्ष दाखिल की। इसमें सभी 11 आरोपियों को क्लीन चिट दे दी गई है। इस मामले में 31 जनवरी को फैसला आ सकता है।

गौरतलब है कि हरियाणा के फरीदाबाद जिले के बल्लभगढ़ स्थित सुनपेड़ गांव में 20 अक्टूबर 2015 को हुए अग्निकांड में एक दलित परिवार के दो दुधमुंहे बच्चों को  बंद कमरे में जिंदा जला दिया गया था। इस अग्निकांड में बच्चों की मां भी 70 फीसदी जल गई थी, जबकि पिता के एक हाथ की हथेली का ऊपरी हिस्सा झुलस गया था। उस समय मृतक बच्चों के पिता जितेंद्र ने आरोप लगाया था कि पड़ोसी सवर्ण परिवारों ने पेट्रोल डाल कर बच्चों की हत्या की है। हत्याकांड के बाद फ़ारवर्ड प्रेस की टीम भी घटनास्थल पर गयी थी। हमने उस समय घटनाक्रम का गहन सामाजिक विश्लेषण फारवर्ड प्रेस में ‘सुनपेड़ हत्या कांड : तथ्य और प्रतिबद्धता का द्वंद्व’ शीर्षक से  प्रकाशित किया था।

मृतक बच्चे और उनके पिता जितेंद्र

पुलिस ने जितेंद्र की  शिकायत पर एक नाबालिग सहित 12 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। जबकि आरोपियों का कहना था कि पति-पत्नी के आपसी झगड़े में पिता ने ही अपने  बच्चों को जिंदा जला दिया। सरकार ने पीड़ित परिवार की मांग पर 27 अक्टूबर 2015 को इस केस की जांच सीबीआई को सौंपी थी। करीब 1 साल से यह मामला पंचकूला में सीबीआई की विशेष अदालत में चल रहा है।

गौरतलब है कि इस मामले में 12वें नाबालिग आरोपी की क्लोजर रिपोर्ट सीबीआई द्वारा पहले ही दाखिल की जा चुकी है।

मृतक बच्चों की मां रेखा देवी

बीते 3 वर्षों में इस मामले में सीबीआई को जांच में इन आरोपियों के खिलाफ कोई साक्ष्य और गवाह नहीं मिला। अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर आरोपी निर्दोष हैं तो बंद कमरे में ज्वलनशील पदार्थ किसने फेंका? क्या बच्चों के पिता ने ही उन्हें जिंदा जलाया था? घटना में बच्चों की मां भी 70 फीसदी जल गई थी, लेकिन उसकी मौत नहीं हुई थी। अगर उसके पति ने ही उसे और उसके बच्चों को जिंदा जलाया था, तो उसने अपने पति के खिलाफ बयान क्यों नहीं दिया?

यह भी पढ़ें : सुनपेड़ हत्या कांड : तथ्य और प्रतिबद्धता का द्वंद्व

जाहिर तौर पर सीबीआई अगर इन प्रश्नों का उत्तर नहीं देती तो उसकी जांच का कोई अर्थ नहीं है। सवाल उठता है कि सीबीआई का काम कांड से पर्दा उठाना है या सिर्फ आरोपियों को क्लीन चिट देना है? हालांकि यह तो अदालत की अगली सुनवाई में ही स्पष्ट हो पाएगा कि सीबीआई इन प्रश्नों को टालती है, या इसकी गहराई में जाने का इरादा रखती है।

(काॅपी संपादन : एफपी डेस्क)

(इनपुट : दैनिक हिंदुस्तान,17 जनवरी, 2019)


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