यंग इंडिया अधिकार रैली निकालकर छात्र-छात्राओं ने सरकार के खिलाफ जताया आक्रोश

वाईआईएनसीसी के बैनर तले छात्र-छात्राओं, अन्य युवाओं व नेताओं ने लाल किले से 7 फरवरी को संसद मार्ग तक यंग इंडिया अधिकार मार्च निकालकर मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। यह आक्रोश मार्च बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई, आरक्षण का हनन, शिक्षा का बजट बढ़ाने समेत अनेक मामलों को लेकर निकाला गया

विपक्ष के नेताओं और युवाओं ने दिया छात्र-छात्राओं का साथ

सरकार के खिलाफ अनेक आंदोलनों के बीच अब ‘यंग इंडिया नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी’ (वाईआईएनसीसी) की अगुआई में सभी छात्र-छात्राओं व युवा संगठनों के सदस्यों और नेताओं ने एक सयुंक्त बैनर तले 7 फरवरी को लाल किले से संसद मार्ग तक यंग इंडिया अधिकार मार्च निकालकर मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इससे पहले 22 जनवरी को यंग इंडिया अधिकार मार्च के समर्थन में दिल्ली के प्रेस क्लब में एक नागरिक सभा आयोजित की गई थी। 7 फरवरी का यह युवा अधिकार मार्च लाल किले से शुरू होकर दिल्ली के संसद मार्ग पर पहुंचा और एक सभा में बदल गया। इस मार्च और सभा में देश के तमाम छात्र-छात्राओं और युवा संगठनों के साथ देश के तमाम विश्वविद्यालय के छात्रसंघ नेता और राजनीतिक-सामाजिक दलों के नेता भी शमिल हुए। इस सभा में अनेक लोगों ने अपनी बात रखी।

इस दौरान विधायक जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि मोदी सरकार, जुमला सरकार है। नौजवान अगर मोदी सरकार को ला सकता है, वह उन्हें हटा भी सकता है। अगर मोदी जी सोच रहे हैं कि सीबीआई के दम पर सरकार में वापस आ सकते हैं, तो उन्हें हम यह बता दें कि अबकी बार कोई जुमला नहीं चलेगा।

वाईआईएनसीसी के बैनर तले सरकार के खिलाफ आक्रोश प्रकट करते छात्र-छात्राएं, अन्य संगठनों के लोग व नेतागण

सीपीआई एमएल के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि सरकार ने अंतरिम बजट में किसान परिवार के लिए घोषित 6 हजार रुपए सालाना यानी महीने में कुल 500 रुपए देने को कहा है। यानी पांच सदस्यों वाले किसान परिवार में प्रति सदस्य के हिस्से में सिर्फ 3 रुपए 30 पैसे ही आएंगे। इतने में अब एक चाय भी नहीं मिलती मोदी जी। इस देश में जो नफरत की खेती हो रही है, लूट और झूठ की खेती हो रही है, वह बंद हो जाएगी।

रैली को संबोधित करते सीपीआईएमएल के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य

आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुचेता डे ने कहा कि अरुण जेटली ट्वीट कर कहते हैं कि देश में बेरोजगारी कोई समस्या नहीं है। अगर नहीं है, तो इतने आंदोलन क्यों नहीं हो रहे हैं। हमने जेटली को भी आज आमंत्रित किया, वह आएं और युवाओं को जवाब दें।

जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष एन साईं बालाजी ने मोदी सरकार को युवा और छात्र विरोधी बताया।

जेएनयू के पूर्व छात्र अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने कहा कि ये युवा चेहरे आज यहां जवाब मांगने के लिए खड़े हैं। देश का लोकतंत्र कोई डब्ल्यूडब्ल्यूई का मैच नहीं है। हमें दंगा नहीं, रोज़गार चाहिए; जुमला नहीं, अधिकार चाहिए।

यंग इंडिया अधिकार रैली निकालते छात्र-छात्राएं व अन्य लोग

स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में हर वर्ग पहले से ज्यादा असुरक्षित हुआ है और सरकार अपनी विफलताओं को छुपाने के लिए हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण का सहारा ले रही है। सरकार की पूरी कोशिश है कि 2019 के चुनाव में किसानों और नौजवानों का मुद्दा ही न उठाया जाए।

डीवाईएफआई के आजाद साहनी ने कहा कि पिछले चार साल में युवाओं ने बहुत कुछ झेला है। मोदी जी अब आपके अच्छे दिन गए। आपने सबसे ज्यादा हम युवाओं पर ही हमले किए हैं। आप हमें हिंदू मुस्लिम में बांटते आये हैं। लेकिन अब हम न हटेंगे न बटेंगे। हम तुम्हें उखाड़ फेंकेंगे।

कार्यक्रम में असम के छात्र नेता रंजीत करमसा, राष्ट्रव्यापी युवा आंदोलन युवा-हल्लाबोल के अनुपम, चंदन पासवान, व अन्य छात्र-छात्राओं, युवाओं और नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली के बयानों को कोट करते हुए अपनी बात रखी।

यंग इंडिया अधिकार मार्च की मुख्य मांगें

  • सभी रिक्त पदों को तुरंत भरा जाए।
  • परीक्षा में पेपर लीक पर भ्रष्टाचार खत्म किया जाए।
  • शिक्षा पर बजट का न्यूनतम 10% खर्च करो।
  • स्कूल बंद करने, सीट कटौती, फंड कटौती, फीस वृद्धि और आरक्षण कटौती की नीतियों को तुरंत रद्द करो।
  • लैंगिक भेदभाव के नियमों को खत्म करो।
  • सभी छात्राओं के लिए हॉस्टल की गारंटी करो।
  • सभी संस्थाओं में यौन उत्पीड़न विरोधी सेल का गठन करो।
  • शिक्षा का भगवाकरण बंद करो।
  • संविधान प्रदत्त आरक्षण को हर हाल में पूरा करो।
  • सभी कैंपों में भेदभाव विरोधी सेल का गठन करो।
  • , कैंपस में अकादमिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी सुनिश्चित की जाए।

(कॉपी संपादन : प्रेम)


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +917827427311, ईमेल : info@forwardmagazine.in

फारवर्ड प्रेस की किताबें किंडल पर प्रिंट की तुलना में सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। कृपया इन लिंकों पर देखें

 

मिस कैथरीन मेयो की बहुचर्चित कृति : मदर इंडिया

बहुजन साहित्य की प्रस्तावना 

दलित पैंथर्स : एन ऑथरेटिव हिस्ट्री : लेखक : जेवी पवार 

महिषासुर एक जननायक’

महिषासुर : मिथक व परंपराए

जाति के प्रश्न पर कबी

About The Author

Reply