h n

डीयू में शिक्षक बहाली : 79 ओबीसी, 41 एससी और 24 एसटी के पद आरक्षित

दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा जारी विज्ञापन के अनुसार अभ्यर्थी शिक्षक पदों के लिए 23 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। प्रस्तुत खबर में विश्वविद्यालय द्वारा जारी विज्ञापन व ऑनलाइन आवेदन हेतु जारी लिंक भी शामिल हैं

हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में विश्वविद्यालय या  संस्थान को इकाई मानते हुए रिक्त पदों पर बहाली हेतु संशोधन अधिनियम संसद में पारित कराये जाने के बाद कई विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के पदों के लिए विज्ञापन जारी किये गये हैं। इस कड़ी में दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा भी एक विज्ञापन जारी किया गया है। इसके तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के 263 पदों के लिए आवेदन पत्र मांगे गए हैं। इनमेंं 79 पद ओबीसी, 41 पद अनुसूचित जाति और 24 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित हैं। अभ्यर्थी 23 जुलाई 2019 तक आवेदन कर सकेंगे।

विश्वविद्यालय द्वारा जारी विज्ञापन में  आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (सवर्ण) लोगों के लिए 36 पद आरक्षित हैं। जबकि दिव्यांगों लिए 9 पद आरक्षित हैं। इस प्रकार शेष 74 पद सामान्य वर्गों के अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित हैं।

यह भी पढ़ें : लखनऊ विश्वविद्यालय में ठेके पर प्रोफेसर, बुद्धिजीवियों ने जताया विरोध

दिल्ली विश्वविद्यालय ने आवेदकों की सहायता के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा दी है। इसके लिए यहां क्लिक करें। इसके जरिए आवेदक को सबसे पहले अपने आपको पंजीकृत कराना होगा। तदुपरांत आवेदन प्रपत्र ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे।

दिल्ली विश्वविद्यालय का मुख्य प्रशासनिक भवन

गौर तलब है कि 13 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम विवाद के पटापेक्ष होने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा जारी यह पहला विज्ञापन है। पूर्णकालिक पदों के लिए वेतनमान सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की अनुशंसाओं के अनुरूप है। जिन विषयों में शिक्षकों की नियुक्ति हेतु आवेदन पत्र आमंत्रित हैं उनमें हिंदी, अंग्रेजी, कला, विज्ञान, कानून, वाणिज्य सहित लगभग 46 विषय शामिल हैं। इनके अलावा चीनी, जापानी, फ्रेंच,जर्मन, इटालियन, पुर्तगाली, स्पैनिश, रुसी, बुल्गेरियन विदेशी भाषाओं व बंगाली, मराठी, मणिपुरी, कन्नड़, मलयालम, तमिल जैसी भारतीय भाषाओं के लिए 36 पदों पर आवेदन मांगे गए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा जारी मूल विज्ञापन देखने के लिए यहां क्लिक करें।

(फारवर्ड प्रेस उच्च शिक्षा जगत से संबंधित खबरें प्रकाशित करता रहा है। हाल के दिनों में कई विश्वविद्यालयों द्वारा नियुक्तियां हेतु विज्ञापन निकाले गए हैं। इन विज्ञापनों में आरक्षण और रोस्टर से जुड़े सवालों को भी हम  उठाते रहे हैं, ताकि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में दलित-बहुजनों समुचित हिस्सेदारी हो सके। आप भी हमारी इस मुहिम का हिस्सा बन सकते हैं। नियोजन संबंधी सूचनाओं, खामियों के संबंध में हमें editor@forwardmagazine.in पर ईमेल करें। आप हमें  7004975366 पर फोन करके भी सूचना दे सकते हैं)

(कॉपी संपादन : नवल)


फारवर्ड प्रेस वेब पोर्टल के अतिरिक्‍त बहुजन मुद्दों की पुस्‍तकों का प्रकाशक भी है। एफपी बुक्‍स के नाम से जारी होने वाली ये किताबें बहुजन (दलित, ओबीसी, आदिवासी, घुमंतु, पसमांदा समुदाय) तबकों के साहित्‍य, सस्‍क‍ृति व सामाजिक-राजनीति की व्‍यापक समस्‍याओं के साथ-साथ इसके सूक्ष्म पहलुओं को भी गहराई से उजागर करती हैं। एफपी बुक्‍स की सूची जानने अथवा किताबें मंगवाने के लिए संपर्क करें। मोबाइल : +917827427311, ईमेल : info@forwardmagazine.in

फारवर्ड प्रेस की किताबें किंडल पर प्रिंट की तुलना में सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। कृपया इन लिंकों पर देखें

 

आरएसएस और बहुजन चिंतन 

मिस कैथरीन मेयो की बहुचर्चित कृति : मदर इंडिया

बहुजन साहित्य की प्रस्तावना 

दलित पैंथर्स : एन ऑथरेटिव हिस्ट्री : लेखक : जेवी पवार 

महिषासुर एक जननायक’

महिषासुर : मिथक व परंपराए

जाति के प्रश्न पर कबी

चिंतन के जन सरोकार

लेखक के बारे में

सुशील मानव

सुशील मानव स्वतंत्र पत्रकार और साहित्यकार हैं। वह दिल्ली-एनसीआर के मजदूरों के साथ मिलकर सामाजिक-राजनैतिक कार्य करते हैं

संबंधित आलेख

हार से खत्म नहीं हुई है स्टालिन की पेरियारवादी राजनीति
स्टालिन इसलिए भी महत्वपूर्ण बने रहेंगे कि उन्होंने राज्य को नीट से छूट और नेशनल एजुकेशन पॉलिसी में तीन भाषा वाली पॉलिसी का कड़ा...
मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट के नजरिए का नया संस्करण
यह मानने में हिचक नहीं होनी चाहिए कि मौजूदा मुख्य न्यायाधीश की पृष्ठभूमि भी संस्थागत है। यह उनकी सीमा है। इसीलिए उनमें वह व्यापक...
गए थे जोतीराव को मारने, बन गए महान सत्यशोधक पंडित धोंडीराम नामदेव कुंभार
संस्कृत तथा धर्म-शास्त्रों में प्रवीण होने के बावजूद धोंडीराम अपने सत्यशोधक होने के लक्ष्य से भटके नहीं थे। सन् 1896 में उनकी एक पुस्तक...
जाति-आधारित जनगणना के लिए महाराष्ट्र में राज्यव्यापी अभियान प्रारंभ
पूरे देश में ओबीसी समुदाय की सही आबादी के आंकड़े, साथ ही उनकी शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति का पता लगाने के लिए जाति-आधारित...
राजस्थान में आरएसएस के कार्यकर्ताओं द्वारा मंदिर हड़पे जाने पर दलित पुजारी ने मोहन भागवत से लगाई गुहार
“संघ के जातिवादी स्वयंसेवकों द्वारा पैदा किए गए विवाद की आड़ में राजस्थान की भाजपा सरकार ने भाजपा विधायक जबर सिंह सांखला और प्रशासन...