आगामी आयोजन : क्या हो लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका, विचार करेंगे डीयू के विद्वान

दिल्ली विश्वविद्यालय के लक्ष्मीबाई काॅलेज में आज के लोकतंत्र और मीडिया के कमजोर होने पर बड़ी चर्चा सामने आ सकती है तो उज्जैन के विश्वविद्यालय में महात्मा गांधी के जीवन से जुड़े 50 से अधिक विषयों और जीवन मूल्यों पर विस्तार से समझने की कोशिश होगी। और क्या-क्या खास आयोजन हैं आगामी दिनों में, बता रहे हैं कमल चंद्रवंशी

भारतीय लोकतंत्र के मौजूदा दौर में मीडिया की भूमिका पर फिलहाल कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। इस मायने में दिल्ली विश्वविद्यालय के लक्ष्मीबाई कॉलेज ने यूजीसी के सहयोग से इस विषय पर 18-19 सिंतबर को कॉलेज सभागार में 2 दिन की राष्ट्रीय संगोष्ठी की अहमियत काफी बढ़ जाती है। मुख्य विषय ‘मीडिया और लोकतंत्र’ के तहत जिन उपविषयों को बताया गया है वे काफी महत्व वाले हैं। मसलन- लोकतांत्रिक संस्थाओं के विकास में मीडिया की भूमिका, मीडिया के विकास में लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मीडिया के संदर्भ में, मीडिया की एजेंडा सेटिंग, मीडिया- ब्रांड निर्माण का एक औजार, मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ, चुनाव लोकतंत्र और मीडिया, मीडिया विमर्श बनाम नैरेटिव, मीडिया का एग्जिट पोल, मीडिया में हाशिए की आवाज, मीडिया के समक्ष मीडिया की चुनौतियां।

जाहिर है, यह विषय बताते हैं कि संगोष्ठी काफी दिलचस्प होगी। आज के समय में जब मीडिया में ही कुछ लोग मुख्य मीडिया के बहिष्कार को लेकर आवाजें उठा रहे हैं तो इस विषय का आकार और बड़ा हो जाता है। यह रोचक या शायद गंभीर स्थिति है कि बहिष्कार की आवाजें खुद मुख्य मीडिया के भीतर से आई हैं या फिर इसी मीडिया के हिस्सा रहे लोगों की ओर से।

सबसे पहले आयोजकों की नजर से जानते हैं। कार्यक्रम संयोजक राजनीति शास्त्र विभाग की संगीता शर्मा कहती हैं कि ‘यह संगोष्ठी महत्वपूर्ण इसलिए हो जाती है कि आज के समय में लोकतंत्र औऱ मीडिया दोनों के अपने-अपने सकारात्मक औऱ नकारात्मक पहलू उभर कर सामने आए हैं। सरकार कुछ काम करती है तो उसका प्रचार-प्रसार चाहती है। दिक्कत यह पैदा हो गई है कि सरकार या लोकतंत्र, मीडिया और जनता के बीच गैप बहुत आ गया है। इसको खत्म होना चाहिए। हम सबका दायित्व है कि इस गैप को खत्म किया जाए।’ वस्तुत: देखा जाए तो इन दिनों ना तो मीडिया तटस्थ रह गया और ना ही लोकतंत्र जनता का सच्चा प्रहरी होकर काम कर रहा है। दोनों अपने अपने पक्ष और प्रभाव का बेजा इस्तेमाल करते दिखते हैं। आज के कई वरिष्ठ हिंदी पत्रकार कहते हैं कि आज के दौर में आप पत्रकार (मीडिया) सिर्फ तटस्थ भी रहें तो यह पत्रकारिता की बड़ी सेवा हो सकती है। तो कई अन्य ऐसे भी पत्रकार हैं जिनकी राय में न्यूज के भारतीय हिंदी टीवी चैनल्स और अखबारों के एक तरफा रवैये को देखते हुए उनको देखना-पढ़ना छोड़ देना चाहिए। बता दें कि इसी दौर में प्रधानमंत्री एक कार्यक्रम के बाद यह कहते सुनाई दिए कि आपने (चैनल ने) उन सब लोगों को (नौकरी पर) रखा है जो मुझे हर समय गरियाते रहते हैं। जाहिर है लोकतंत्र को मीडिया औऱ मीडिया को लोकतंत्र से बराबर खतरे का आभास इन किस्म के वक्तव्यों से होता है।

जाहिर है, इस विषय को ये मीडिया संगोष्ठी बौद्धिक और अकादमिक नजरिए से बहुत तार्किक बना सकती है।

भारतीय मीडिया की साख पर उठने लगे हैं सवाल

 संगोष्ठी में प्रतिभागियों को अपने शोधपत्र का सार-संक्षेप 25 अगस्त तक भेजना होगा। पहले यह तिथि 19 अगस्त थी जो बाद में बढ़ा दी गई। सभी सार-संक्षेपों में जो 29 अगस्त को स्वीकृत हो जाएंगे वो अपने पूर्ण शोधपत्र को 8 सितंबर तक जमा कर सकते हैं। पंजीकरण करने की आखिरी तारीख 14 सितंबर 2019 है। इस बारे में कोई भी संपर्क mediaseminarlbc@gmail.com पर किया जा सकता है। कार्यक्रम की संयोजक संगीता शर्मा को 8860264802 पर फोन कर विस्तृत जानकारी ली जा सकती है।

नामवर सिंह की आलोचना दृष्टि पर चर्चा

मार्क्सवाद, भारतीय समाज और हिंदी साहित्य के बारे में प्राख्यात आलोचक नामवर सिंह की राय क्या थी और वे हिन्दी साहित्य को किस रूप में देखना चाहते थे, इन सबके बारे में और जानकारियां आपको मिल सकती हैं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में होने वाले सेमिनार में। इसका शीर्षक है- ‘हिन्दी आलोचना के नए आयाम और नामवर सिंह।’ जेएनयू के भारतीय भाषा केंद्र ने 27 अगस्त 2019 को यह कार्यक्रम आयोजित किया है जिसमें प्रोफेसर गोपेश्वर सिंह एकल व्याख्यान रखेंगे। यह कार्यक्रम भाषा संस्थान के कमेटी रूम 212  में होगा। कार्यक्रम दोपहर 2:30 बजे शुरू होगा।

पंचकूला में अंत: विषय कार्यशाला 

पंचकूला के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में स्थापित बाल्मीकि शोध पीठ हरियाणा और साहित्य अकादमी पंचकूला के संयुक्त तत्वावधान में सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय अंतः विषय कार्यशाला का आयोजन किया गया है। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन सितंबर माह में किया जाएगा।


कार्यशाला में देश-विदेश के विद्वान अपने विचार रखेंगे। कार्यक्रम में जो भी प्रतिभागी इस कार्यशाला में भाग लेने की इच्छुक हैं, कोई जल्दी ही अपना नंबर और पता व्हाट्सएप के नंबर 9466617818 पर भेज सकते हैं। जल्दी ही कार्यक्रम की तिथि घोषित की जाएगी।

भाषा, संस्कृति और पर्यावरण के सवाल

कुल्लू हिमाचल प्रदेश का बड़ा सांस्कृतिक केंद्र है। यहां रूपी सिराज कला मंच ने हिमाचल प्रदेश कला संस्कृति और भाषा अकादमी के सहयोग से 9 से 10 सितंबर को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया है। कार्यक्रम के विषय हैं लोक भाषाएं एवं अभिव्यक्ति, लोक साहित्य और परंपराएं, लोक कलाओं में संगीत, भारतीय सांस्कृतिक विरासत- संरक्षण एवं संवर्धन, जल संरक्षण एवं मानव अस्तित्व, औषधीय विज्ञान- प्रयोग एवं उपचार, मीडिया- अपेक्षाएं और चुनौतियां, पर्यावरण एवं मानव अस्तित्व पर्यटन तथा यायावरी साहित्य व देव परंपराएं और आनुष्ठिक क्रिया विधियां।

यह एक बहुविषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी है। लेकिन इसका मूल विषय भाषा संस्कृति और पर्यावरण के संदर्भ में इनके प्रयोग, संरक्षण और अवलोकन से जुड़े होंगे। कार्यक्रम ढालपुर के देवसदन में होगा। इसमें राज्य और देशभर से प्रतिभागी शामिल हो सकते हैं। कार्यक्रम की ज्यादा जानकारी के लिए रूपी सिराज मंच के अध्यक्ष डॉक्टर इंद्र सिंह ठाकुर को 94184 94899 और 88940 77377 पर संपर्क कर सकते हैं।

साहित्य और पत्रकारिता के सवाल

साहित्य अकादेमी ने बृहस्पतिवार 22 अगस्त को साहित्य और पत्रकारिता विषयक परिसंवाद रखा है। अकादेमी के कार्यालय 35, फिरोजशाह रोड पर स्थित रवींद्र भवन में होने वाले इस कार्यक्रम में कई विद्वान शिरकत कर रहे हैं। उद्घाटन सत्र सुबह 10 बजे से शुरू होगा जिसमें माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अच्युतानंद मिश्र, हिंदी परामर्श के सदस्य अरुण कुमार भगत, उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष राजनारायण शुल्क विचार रखेंगे। कार्यक्रम का सचांलन अनुपम तिवारी करेंगे जबकि अकादेमी के सचिव के. श्रीनिवास राव मेहमानों का स्वागत करेंगे।

पहला सत्र दोपहर 12 बजे से है जिसकी अध्यक्षता हिंदुस्तानी अकादमी के अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह करेंगे। अमर उजाला के संपादक उदय सिन्हा, प्राध्यापक और मीडिया विश्लेषक अवनिजेश अवस्थी और प्राध्यापक व मीडिया विश्लेषक जितेद्र वीर कालरा विशेष वक्तव्य रखेंगे। दूसरा सत्र अपराह्न ढाई बजे से होगा जिसकी अध्यक्षता महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति अनिल कुमार राय करेंगे जबकि पंजाब केसरी के प्रंबध संपादक किरण चोपड़ा व लेखक-पत्रकार अशोक कुमार ज्योति प्रमुख वक्ता होंगे। कार्यक्रम के बारे में अकादेमी के आफिस 011 23385626/ 27/ 28 पर संपर्क किया जा सकता है। अकादेमी का ईमेल पता है- secretary@sahitya-akademi.gov.in

महात्मा गांधी का संपूर्ण चिंतन

हिंदी अध्ययन शाला और विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन ने महात्मा गांधी के 150वीं जयंती वर्ष पर दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन किया है जो उज्जैन में 21 और 22 सितंबर 2019 को होगी। शोध संगोष्ठी का विषय– महात्मा गांधी शिक्षा संस्कृति और भारतीय भाषाएं है। इस संगोष्ठी में देश के प्रतिष्ठित विद्वान. साहित्यकार, जानकार और शोधकर्ताओं द्वारा विशिष्ट व्याख्यान, शोध, आलेख प्रस्तुति और संवाद होगा।


प्रतिभागी 10 सितंबर तक अपने शोध के सार-संक्षेप को भेज सकते हैं। सारांश 300 शब्दों तक सीमित रखें जबकि मुख्य शोध पेपर 3000 शब्दों का होना चाहिए। इसके लिए कार्यक्रम के मुख्य समन्वय शैलेद्र कुमार शर्मा, आचार्य विक्रम विश्वविद्यालय के ईमेल पते shalendrakumarsharma66@gmail.com  पर भेज सकते हैं।

उपविषयों में कुछ इस तरह हैं- महात्मा गांधी का कला विज्ञान, बुनियादी शिक्षा और महात्मा गांधी, भारती. भाषाएं और महात्मा गांधी, महात्मा गांधी का संस्कृति दर्शन, उच्च शिक्षा और महात्मा गांधी, भारतीय शिक्षा नीति और महात्मा गांधी, महात्मा गांधी का भाषा चिंतन, महात्मा गांधी का भारतीय साहित्य पर प्रभाव, महात्मा गांधी का पर्यावरणीय चिंतन, सामजिक समरसता में महात्मा गांधी का चिंतन, महात्मा गांधी और देवनागरी लिपि, भारत की भाषा समस्या और महात्मा गांधी, स्वदेशी की अवधारणा और महात्मा गांधी, माध्यमिक औऱ उच्चतर शिक्षा और महात्मा गांधी, महात्मा गांधी- कला और शिल्प चिंतन, खादी चरखा और महात्मा गांधी, स्वदेशी चिकित्सा और महात्मा गांधी, महात्मा गांधी की पत्रकारिता, समकालीन विमर्श और महात्मा गांधी, महात्मा गांधी का भारतीय साहित्य पर प्रभाव,  महात्मा गांधी का विश्व साहित्य पर प्रभाव, महात्मा गांधी और विश्व सिनेमा, महात्मा गांधी और समाज चिंतन, सामाजिक समरसता में महात्मा गांधी के चिंतन का अवदान, रूढ़ि उन्मूलन, नशा मुक्ति और महात्मा गांधी, महात्मा गांधी का दार्शनिक चिंतन, गांधीवाद का विश्वचिंतन पर प्रभाव, महात्मा गांधी का राजनीतिक चिंतन, भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन और महात्मा गांधी, मानवाधिकार और महात्मा गांधी, महात्मा गांधी का आर्थिक चिंतन वैश्विक संदर्भ में, स्वदेशी की अवधारणा और महात्मा गांधी, सहकारिता आंदोलन और महात्मा गांधी, महात्मा गांधी का चिंतन एवं विज्ञान, प्रवासी साहित्य में गांधी दर्शन का प्रभाव, विदेशी भाषा साहित्य पर गांधी का प्रभाव।

कार्यक्रम के मुख्य समन्वयकों मं शैलेंद्र कुमार शर्मा (उज्जैन- 09826047765), प्रोफेसर प्रेमलता चुटैल (उज्जैन9993067067), सुधाकर पाठक (दिल्ली 9873556781) और प्रोफेसर गीता नायक (उज्जैन 9926834596) हैं। इसके अलावा समन्वयकों में जगदीश चंद्र शर्मा 9425916772, प्रतिष्ठा शर्मा 9425916772 और सह-समन्वयक रचना जैन 8989503149पर किसी भी ज्यादा जानकारी के लिए संपर्क किया जा सकता है।

शंकराचार्य की महिमा बताने का मतलब 

आगामी 25 अगस्त 2019 को आदि शंकराचार्य के अनुयायियों ने दिल्ली में विशेष कार्यक्रम रखा है। इसके जरिए आयोजकों की कोशिश है कि शंकराचार्य की जीवनी लोगों तक पहुंचायी जाय। इसके लिए कहानी भी गढ़ी गई है। इसका मकसद दलितों को हिन्दुत्व के खांचे में लाना है। इस कहानी में बताया जा रहा है कि शंकराचार्य ने अस्पृश्यता का दंश झेलने वाले बनारस के एक श्मशान घाट के चांडाल को अपना गुरू माना था। 

आयोजकों ने फारवर्ड प्रेस से बातचीत में कहा कि भारतीय एकता, अखण्डता, सभ्यता, संस्कृति, सनातन धर्म की रक्षा और प्रचार प्रसार के लिये हमें आदि शंकराचार्य के ज्ञान को जन-जन तक ले जाना होगा।

“आदि शंकराचार्य जनसेवा ट्रस्ट”, दिल्ली के तत्वावधान में इस विशेष परिचर्चा का आयोजन दिल्ली के हिमाचल भवन (मंडी हाउस, मेट्रो स्टेशन) के सम्मेलन कक्ष में शाम 5 से 8 बजे तक किया है। इस बौद्धिक परिचर्चा में संस्कृत व हिन्दी के विद्वानों से परामर्श, सुझाव, जिज्ञासा-समाधान के साथ आमंत्रित किए गए हैं। कार्यक्रम में सीमित व्यवस्था है इसलिए जो भी इस कार्यक्रम में जाएं, अपने शामिल होने की सूचना आयोजकों को दे दें। आयोजकों ने खान-पान और रात्रिभोज का भी प्रबंध किया है। कार्यक्रम संबंधी ज्यादा जानकारी के लिए डॉ. प्रवीण द्विवेदी 9911039794 या फिर विनोद सिंघल 9311005931 से संपर्क किया जा सकता है।    

मानविकी और विज्ञान के अंतर्संबंध

वेदांत प्रकाशन और शिक्षण सेवा संस्था और राजकोट (गुजरात) के धर्मेंद्रसिंहजी कॉलेज ने संयुक्त रूप से दो दिन का ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन अनऐबिलिटी ऑफ ट्रांसडिस्पलनेटरी’ विषयक खास आयोजन रखा है। कॉलेज सभागार में होने वाले इस कार्यक्रम में 30 अगस्त को जहां मानविकी और समाज विज्ञान पर केंद्रित कार्यक्रम होगा तो 31 अगस्त 2019 को इंजीनियरिंग, आईटी, साइंस एजूकेशन और जर्नलिज्म पर संवाद, शोध पत्र और आलेखों की प्रस्तुति होगी।

आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम में वेदांत समूह के संस्थापक डॉक्टर अर्जुन दवे और कॉलेज के प्रचार्य डॉ एएस राठौर कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। दोनों दिन के कार्यक्रम में कम से कम 400 प्रतिभागियों के शामिल होने की बात कही गई है। वीडियो पेपर प्रजटेंशन का कार्यक्रम 25 अगस्त को होगा।

कॉन्फ्रेंस के सह समन्वयकों में जगदीश उपाध्याय 9825212338, कृष्ण दइया 7984443212 और सीएस राज सोनी 9726999915 से इस कार्यक्रम के बारे में ज्यादा जानकारी ली जा सकती है।

विभिन्न विषयों के मेल पर शोधपत्र

तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले के मुख्यालय नागरकोइल स्थित श्री अयप्पा कॉलेज फॉर वूमन और यहीं की संस्था वॉइस ऑफ टीचर ने यूजीसी-केयर में लेखन और प्रकाशन जर्नल संबंधी अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया है। अट्टूर स्थित एनवीकेएसडी कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर और संयोजकों में एक डॉ आरपी दीपा ने फोन पर जानकारी दी ये कार्यशाला 26 अगस्त को सुबह 10 बजे से परिसर में शुरू होगी। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में 100 या इससे अधिक प्रतिभागी शामिल हो सकते हैं। समाज और जीवन के “विविध विषयों और अनुशासनों का मेल” इस कार्यशाला की थीम है।

जानकारी के मुताबिक ये दोनों संस्थाएं तमिलनाडु के अकादमिक जगत में खासी पहचान रखते हैं। इनके विख्यात रिसोर्स पर्सन में केरल विश्वविद्यालय के डॉक्टर एम. समीर बाबू और ब्रिटिश यूनिवर्सिटी दुबई के प्रोफेसर सोलोमोन डेविड हैं। आयोजन समिति के संरक्षक एम संगीथ कुमार और डॉक्टर टी. मुरुगन हैं। कार्यक्रम के सह-समन्वयकों में कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से जुड़े जी. रेक्सलिन जोस, आरपी दीपा, पी मुरुगन और डॉ जॉन लिंग्स हैं जिनको 9894916237, 94873 70135 और 94874 49585 पर संपर्क किया जा सकता है।

 

(कॉपी संपादन : नवल)


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