आंबेडकर जयंती पर “हिंदू धर्म की पहेलियां” सहित तीन किताबों का विमोचन, निजीकरण के सवाल पर विचार गोष्ठी

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद के माता कॉलोनी, विजय नगर के इलाके में दलित-बहुजन पिछले तीस वर्षों से आंबेडकर जयंती धूमधाम से मनाते आ रहे हैं। इस बार तीन किताबों का विमोचन होगा तथा निजीकरण के संदर्भ में डॉ. आंबेडकर के विचार के सवाल पर गोष्ठी आयोजित है

आगामी 14 अप्रैल, 2021 को डॉ. भीमराव आंबेडकर की 130वीं जयंती के मौके पर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के माता कॉलाेनी, विजय नगर के आंबेडकर पार्क में खास कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में डॉ. आंबेडकर द्वारा लिखित किताब “हिंदू धर्म की पहेलियां : बहुजनो! ब्राह्मणवाद का सच जानो” (फारवर्ड प्रेस, नई दिल्ली), “बहुजन नवजागरण व प्रतिरोध के विविध स्वर” (अगोरा प्रकाशन, वाराणसी) और “आधुनिक परिदृश्य और बौद्ध धर्म” (सम्यक प्रकाशन, नई दिल्ली) का विमोचन किया जाएगा। साथ ही, “निजीकरण से बढ़ती गुलामी और बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर” विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन भी होगा। इस आशय की जानकारी कार्यक्रम के आयोजक डॉ. भीमराव आंबेडकर विचार मंच एवं जन्मोत्सव समिति के सदस्य व सामाजिक कार्यकर्ता लखीमचंद ने दी। 

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत सुबह आठ बजे बुद्ध वंदना से होगी। इस मौके पर बौद्ध धर्म के विशेषज्ञ व लेखक रघुबीर सिंह, मेरठ कॉलेज के प्रोफेसर सतीश प्रकाश, कृषि वैज्ञानिक डॉ. जगपाल सिंह, दौलतराम कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. नीतिशा खलखो, मैत्रेयी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. सविता पाठक, लेखक व पत्रकार डॉ. सिद्धार्थ, कांग्रेस के महासचिव बदर कुरैशी, पत्रकार व लेखक संजय कबीर व सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एस.पी. सिंह सहित कई अन्य प्रबुद्ध बुद्धिजीवी अपने विचार रखेंगे।

लखीमचंद ने बताया कि संस्था द्वारा पिछले तीस वर्षों से यह आयोजन किया जा रहा है। वर्ष 2005 के पहले यह स्थानीय स्तर पर होता था, लेकिन इसके बाद आयोजन के स्वरूप को वृहद बनाया गया है। इस आयोजन में अब सैकड़ों की संख्या में लोग भाग लेते हैं। 

गाजियाबाद के माता कॉलोनी, विजयनगर के आंबेडकर पार्क में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा के नीचे खड़े गणमान्य (फाइल फोटो)

आयोजन समिति के सदस्य वीर सिंह ने बताया कि इस बार के कार्यक्रम में खास तीन पुस्तकों का विमोचन कार्यक्रम है। जिन तीन पुस्तकों का विमोचन इस मौके पर किया जाएगा, वे सभी दलित-बहुजनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनमें से एक किताब “हिंदू धर्म की पहेलियां : बहुजनो! ब्राह्मणवाद का सच जानो”, जिसका प्रकाशन फारवर्ड प्रेस द्वारा किया गया है, के संपादक डॉ. सिद्धार्थ हैं। यह किताब डॉ. आंबेडकर की मूल किताब का नया अविरल अनुवाद है तथा इसे विस्तृत संदर्भों के माध्यम से समृद्ध किया गया है। वहीं अगोरा प्रकाशन, वाराणसी द्वारा प्रकाशित किताब “बहुजन नवजागरण व प्रतिरोध के विविध स्वर” के लेखक भी डॉ. सिद्धार्थ हैं। तीसरी पुस्तक “आधुनिक परिदृश्य और बौद्ध धर्म”, बौद्ध धर्म के विशेषज्ञ रघुबीर सिंह द्वारा लिखित है तथा इसका प्रकाशन सम्यक प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा किया गया है।

वीर सिंह ने बताया कि आयोजन के दौरान हमारी कोशिश रहती है कि देश में मौजूदा हालात से संबंधित महत्वपूर्ण विषय पर विचार गोष्ठी हो ताकि आयोजन में शामिल होने वाले लोग तय विषय के बारे में जान सकें। इस बार हम लोगों ने निजीकरण के विषय पर विचार गोष्ठी रखी है। ऐसा इसलिए कि केंद्र सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के निजीकरण पर जोर दिया जा रहा है। इसका एक पक्ष यह है कि निजी क्षेत्र में आरक्षण की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में दलित-बहुजन वर्ग जो कि पहले से ही शोषित और वंचना का शिकार है और उसको ध्यान में रखते हुए संविधान में आरक्षण की व्यवस्था की गई है, और पिछड़ जाएगा। 

(संपादन : अमरीश/नवल)


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