बहुजन खुद लिखें अपना इतिहास, नवयान प्रकाशन समूह दे रहा है फेलोशिप

जो दलित इतिहास के किसी अनछुए या अज्ञात पहलू को उजागर करने वाली पांडुलिपि पर काम करने के इच्छुक हैं, उनके लिए एक-एक लाख रुपए की दो फेलोशिप उपलब्ध हैं। प्रस्तावों के प्रस्तुतीकरण के संबंध में मार्गनिर्देशिका में कहा गया है कि “दलित इतिहास शब्द की परिधि व्यापक है और हम चाहेंगे कि आवेदक इस शब्द की अपनी व्याख्या से हमें चकित करें”

‘नवयान दलित हिस्ट्री फ़ेलोशिप 2021’ के लिए 31 मई तक आवेदन स्वीकार किये जाएंगे

बहुजन इतिहास, मानवशास्त्र और इनसे संबंधित अन्य विषयों पर अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के अग्रणी प्रकाशक, नवयान, नयी दिल्ली, द्वारा प्रथम द नवयान दलित हिस्ट्री फ़ेलोशिप के लिए आवेदन आमंत्रित किये गए हैं। इस फ़ेलोशिप की औपचारिक घोषणा बाबासाहेब डॉ. बी.आर. आंबेडकर की जयंती, 14 अप्रैल, को निर्णायक मंडल के सदस्यों द्वारा संक्षिप्त ऑनलाइन प्रस्तुतीकरण के साथ की गई* निर्णायक मंडल के सदस्यों में हार्वर्ड विश्वविद्यालय में सीनियर फेलो और ‘कास्ट मैटर्स’ के लेखक सूरज येंग्ड़े, स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक और ‘द सैफरन वेव: डेमोक्रेसी एंड हिन्दू नेशनलिज़्म इन मॉडर्न इंडिया’ के लेखक थॉमस ब्लोम हेनसन, पत्रकार और ‘कमिंग आउट एज ए दलित: ए मेमॉयर’ की लेखिका यशिका दत्त, सेंट जोसफ्स कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स, बेंगलुरु, में अंग्रेजी की सहायक प्राध्यापक और बहुपठित ब्लॉग ‘डेट लिट् राइटर’ की लेखिका दिव्या मल्हरी, हफ़पोस्ट इंडिया के पूर्व संपादक और ‘ए फ्री मैन: ए ट्रू स्टोरी ऑफ़ लाइफ एंड डेथ इन डेल्ही’ के लेखक अमन सेठी, सिनसिनाटी विश्वविद्यालय में इतिहास की प्राध्यापक और ‘दलित वीमेन्स एजुकेशन इन मॉडर्न इंडिया: डबल डिस्क्रिमिनेशन’ की लेखिका शैलजा पाइक और नवयान समूह के प्रकाशक एस. आनंद शामिल हैं। 

घोष्णा के मुताबिक 1-1 लाख रुपए की दो फ़ेलोशिप उपलब्ध हैं, जो दलित इतिहास के किसी अब तक अज्ञात या अनछुए पहलू को उजागर करने वाली पांडुलिपि पर काम करने के लिए दी जाएंगीं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई 2021 है। आवेदकों के लिए कोई आयु सीमा नहीं है, परंतु उन अध्येताओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जो अपने करियर के शुरूआती दौर में हैं। 

आवेदन के साथ 3,000 शब्दों तक का प्रस्ताव और दो पृष्ठों तक में आवेदक का जीवनवृत्, जिसमें उनका नाम, ईमेल पता, संपर्क करने के लिए टेलीफोन नंबर और निवास का पता दर्ज हो, प्रस्तुत किया जाना चाहिए। आवेदक अपने पूर्व प्रकाशित विस्तृत लेखों की पत्तियां भी संलग्न कर सकते हैं। जो आवेदक अंग्रेजी से इतर अन्य भाषाओं में लेखन करते हैं, उन्हें अपने प्रस्ताव का अंग्रेजी में अनुवाद करवाकर, मूल प्रस्ताव और अनुवाद दोनों संलग्न करना होगा। सभी दस्तावेज माइक्रोसफ्ट वर्ड के (.doc या .docx) फॉर्मेट में होने चाहिए। प्रस्ताव को alex@navayana.org पर ईमेल द्वारा प्रेषित करें। ईमेल की सब्जेक्ट लाइन में लिखें: <Navayana Dalit History Fellowship 2021>। आवेदन संयुक्त रूप से भी प्रस्तुत किये जा सकते हैं, परंतु ऐसे प्रस्तावों के चयनित होने की स्थिति में फ़ेलोशिप की राशि को दल के सभी सदस्यों में बराबर- बराबर बांटा जाएगा।

प्रस्तावों के प्रस्तुतीकरण के संबंध में जारी मार्गनिर्देशिका में कहा गया है कि प्रस्ताव में “परियोजना के कामचलाऊ शीर्षक के साथ-साथ, उसके उद्देश्य, कार्यविधि और विषय विस्तार का विवरण भी होना चाहिए। शैली व प्रारूप से संबंधित अतिरिक्त जानकारी का भी स्वागत है…उदाहरण बतौर हम आंदोलनों, अभियानों, स्थानीय संघर्षों, वैचारिक या सांस्कृतिक आंदोलनों, संस्थाओं या पत्रिकाओं के इतिहास के साथ-साथ जीवनियों व किसी व्यक्ति के जीवन की कहानी का भी स्वागत करेंगे। दलित इतिहास शब्द की परिधि व्यापक है और हम चाहेंगे कि आवेदक इस शब्द की अपनी व्याख्या से हमें चकित करें…प्रस्ताव में पांडुलिपि तैयार में लगने वाली संभावित समयावधि का उल्लेख भी होना चाहिए।”

निर्णायक मंडल द्वारा ऑनलाइन साक्षात्कार के लिए 10 आवेदकों का चयन किया जाएगा। चयन के मुख्य मानदंड होंगे “प्रस्ताव की मौलिकता, विचारों की स्पष्टता, लेखन का लालित्य और विभिन्न वर्गों के पाठकों को संबोधित करने की क्षमता।” साक्षात्कार 14 से 19 जून के बीच आयोजित किए जाएंगे। साक्षात्कार के कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी, चयनित आवेदकों को दे दी जाएगी। 

अंतिम रूप से फ़ेलोशिप के लिए चयनित उम्मीदवारों के नामों की घोषणा जून, 2021 के अंत तक की जाएगी। फ़ेलोशिप प्राप्तकर्ताओं द्वारा जो पांडुलिपि लिखी जाएगी, उसकी लम्बाई कम से कम 50,000 शब्द होगी। अगर कोई फेलो, अंग्रेजी से इतर किसी भाषा में अपनी पांडुलिपि लिखेगा तो उसे पांडुलिपि का अंग्रेजी में अनुवाद करवाना होगा। नवयान अनुवादक ढुंढने में फेलो की मदद कर सकेगा, परंतु अनुवाद का खर्च नहीं उठाएगा। मार्गनिर्देशिका में कहा गया है कि “लेखन कथा-साहित्य (फिक्शन) नहीं होना चाहिए। वह विद्वत्तापूर्ण होने के साथ-साथ गैर-विशेषज्ञ वयस्क पाठक के लिए उपयुक्त भी होना चाहिए। लेखन पूर्व में किये गए शोध या मैदानी कार्य पर आधारित भी हो सकता है। जो लोग दलित इतिहास से संबंधित अनुवाद कार्य कर रहे हैं, वे भी आवेदन कर सकते हैं।” 

(अनुवाद : अमरीश हरदेनिया, संपादन : नवल)


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