h category

सम-सामयिकी

मध्य प्रदेश के बालाघाट में बॅाक्साइट खनन के विरोध में स्थानीय आदिवासी
बमनी की सुंदरा टेकाम करीब 50 वर्ष की होंगी। वह कहती हैं कि “हम सालों से जंगल के पास बसे हुए हैं। जंगल हमें घर बनाने की मिट्टी से लेकर खाने के लिए खाना तक...
कागज़ बनाम आदिवासी : जीतू मुंडा प्रकरण का ऐतिहासिक अर्थ
जीतू मुंडा की यह घटना कोई बेचारगी भरी अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। आदिवासी पूर्वजों की वही ऐतिहासिक चेतावनी, जो हमें याद दिलाती है कि यदि हम कागज़ को ही अंतिम सत्य मानते रहेंगे...
भाजपा चाहती है कि मुसलमान, हिंदू पिछड़े और दलित नागरिक की तरह न सोचें
हिंदुत्ववादी राजनीति को मुसलमानों के मुसलमानों की तरह सोचने से कोई दिक्कत नहीं है। उसे दिक़्क़त बस मुसलमानों के नागरिक की तरह सोचने से है। इस तथ्य की ऐसे भी तस्दीक की जा सकती है...
‘बॉडी काउंट’ : लैंगिक असमानता के खिलाफ नए तेवर की शार्ट फिल्म
एक सवाल से अगर स्त्री के बॉडी काउंट एक से अधिक हुए तो उसके चरित्र पर धब्बा लग जाता है और वहीं पुरुष का एक से जितना अधिक, मर्दानगी का तमगा उतना बड़ा होता है।...
रांची में स्टेन स्वामी की जयंती पर एसआईआर और परिसीमन का विरोध
अपने संबोधन में डॉ. परकला प्रभाकर ने कहा कि असम में जहां केवल स्पेशल रिवीजन (एसआर) हुआ, वहां...
शूद्र विद्रोह : हिंदू राष्ट्रवाद का प्रतिविमर्श
स्वीकार करना होगा कि कांचा आइलैय्या शेपर्ड की पुस्तक ‘शूद्र विद्रोह : ताकि बन सके आत्मनिर्भर भारत’ बहुजन...
एलपीजी संकट से प्रवासी मजदूर लौट रहे, लेकिन अब गांवों में भी रोजगार की गारंटी नहीं
मनरेगा की स्थिति पर अस्पष्टता मजदूरी भुगतान में भी दिख रही है। बीते 21 जनवरी, 2026 से सभी...
उत्तर प्रदेश में प्रतिमाओं की राजनीति
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लंबे समय से यह विवाद चलता रहा है कि राजा मिहिर भोज राजपूत थे...
और आलेख