h category

साहित्‍य

‘लोकविद्याधर’ : लोककला, श्रम और असमान विकास की विडंबना की कहानी
रामजी यादव की कहानी ‘लोकविद्याधर’ लोककला के क्षरण, पारंपरिक कारीगर जातियों के रोजगार-संकट, बाजार के अमानवीय दबाव और जाति-वर्ग से निर्मित सामाजिक दूरी को एक ही कथासूत्र में पिरोती है। बता रहे हैं अरुण नारायण
डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह की साहित्यिक, भाषायिक व वैचारिक यात्रा
डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह की प्रकाशित कृतियां भाषा-विज्ञान, साहित्यालोचना, इतिहास-बोध, लोकसंस्कृति तथा बहुजन विमर्श के विविध आयामों को अपने आप में समेटी हुईं हैं। वे बौद्ध चेतना, बहुजन साहित्य विमर्श तथा सामाजिक न्याय की वैचारिकी...
‘पीली छतरी वाली लड़की’ की जाति
अगर विश्वविद्यालय में दिखाई देने वाला जातिवाद आसमान से नहीं टपका है, बल्कि यह समाज में मौजूद जातिवाद का ही विस्तार है, तो फिर जाति के प्रश्न को समाज और परिवार तक ले जाने में...
खड़ी बोली की कविता जगत को चुनौती देतीं राजेश पाल की कविताएं
कवि सवाल करता है कि ‘फिर चमारीखेड़ा के नाम में ऐसा क्या चुभ गया, जो लोगों को रास नहीं आता’। तथाकथित ऊंची जाति वालों को यह नाम लगातार चुभता रहा, क्योंकि उन्हें अपने गांव का...
आदिवासी स्त्रियों के साथ होने वाले शोषण की दास्तान
जसिंता केरकेट्टा की बीस कहानियों का संग्रह ‘औरत का घर’ इस विरोधाभास को बख़ूबी उजागर करता है कि...
दो महात्माओं की कहानी
इस पुस्तक का केंद्रीय संदेश यही है कि महात्मा की उपाधि से अधिक महत्वपूर्ण यह देखना है कि...
वर्चस्ववादी विमर्शों के खिलाफ प्रति-विमर्श बयान करता एक लघु उपन्यास
‘हड़प्पा: गॉड्स सिटी ऑफ़ सिविलाईजेशन’ – कांचा आइलैय्या शेपर्ड का कथा साहित्य के क्षेत्र में प्रवेश एक साहसिक...
विज्ञान को समझने की पहली किताब ‘मिथकों से विज्ञान तक’
विज्ञान परिवर्तनवादी है। वह एक धारणा या एक मान्यता पर स्थिर नहीं है। गौहर रज़ा कहते हैं कि...
और आलेख