आरक्षण के लिए आर्थिक स्थिति मायने नहीं रखती

आरक्षण को पिछड़ेपन से जोड़ना एक ब्राह्मणवादी दुष्प्रचार है। इसका संबंध सामाजिक अपमान और जातीय भेदभाव से है। एससी-एसटी के आर्थिक पिछड़ेपन का आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं है। यूरोप-अमेरिका जैसे देशों में भी आर्थिक बराबरी की हैसियत रखने के बावजूद भी दलितों को सवर्णों के अपमान का सामना करना पड़ता है। बात रहे है, लोकेश कुमार

यह कहना कि एससी-एसटी को आरक्षण की आवश्यकता है क्योंकि वे पिछड़े हैं, ब्राह्मणवादी दुष्प्रचार है

पदोन्नति में आरक्षण के संबंध में केंद्र सरकार के दोषपूर्ण दृष्टिकोण को समझना जरूरी है। पिछड़ापन का अर्थ है “जितनी प्रगति होनी चाहिए या जितने की उम्मीद की जाती है, उसकी तुलना में कम प्रगति की स्थिति”। सबसे बड़ी जरूरत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के पिछड़ेपन की जड़ को उजागर करना है।

उनके पिछड़ेपन की जड़ जाति व्यवस्था है। अनुसूचित जाति- अुनुसूचित जनजातियों  को आरक्षण इसलिए प्रदान किया जाता है क्योंकि हजारों सालों से उनके खिलाफ भेदभाव किया गया था, और यह भेदभाव अभी भी जारी है। …..

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