कैंसर से जीतने में कामयाब हो रहे लोकेश, दुर्गा का प्रकोप कह अफवाह फैला रहे थे ब्राह्मणवादी

पिछले वर्ष छत्तीसगढ़ के कांकेर में दुर्गा के उपासकों के खिलाफ पहली बार मामला दर्ज करवाने वाले लोकेश सोरी मैक्सिलरी कैंसर पर विजय पाने में कामयाब हो रहे हैं। ब्राह्मणवादियों ने यह कहकर उनकी हिम्मत तोड़ने की कोशिश की थी कि यह सब दुर्गा के प्रकोप के कारण हुआ है। लोकेश के मुताबिक, बीमारी ने उनका शरीर कमजोर किया, हिम्मत को नहीं। फारवर्ड प्रेस की खबर :

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के पखांजूर के निवासी लोकेश सोरी से कैंसर ही नहीं ब्राह्मणवादियों की सोच भी हार रही है। मैक्सिलरी कैंसर (नाक में होने वाले कैंसर) के कारण लोकेश की स्थिति दिनों-दिन बिगड़ती जा रही थी। उनके बारे में ब्राह्मणवादियों ने अफवाह फैलाना शुरू कर दी थी कि यह सब दुर्गा के प्रकोप का परिणाम है। लोकेश ने दुर्गा का अपमान किया है और जब तक वह दुर्गा के आगे सिर नहीं नवाएगा, तब तक उसे बीमारी से मुक्ति नहीं मिलेगी। ब्राह्मणवादियों की इस अफवाह का असर लोकेश के परिजनों पर भी हुआ। कांकेर में इलाज की बेहतर व्यवस्था नहीं होने के कारण लोकेश की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही थी।

दुर्गा के उपासकों के खिलाफ पहली बार मामला दर्ज कराया था लोकेश ने

दलित वर्ग में शामिल गांडा जाति के लोकेश सोरी पिछले वर्ष चर्चा में तब आए थे, जब उन्होंने 28 सितंबर 2017 को पखांजूर थाने में दुर्गा पूजा के उपासकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि रावण और महिषासुर उनके पुरखे हैं और उनकी हत्या का प्रदर्शन कर ब्राह्मणवादी उनका अपमान कर रहे हैं। उनकी इस शिकायत पर तब कांकेर से लेकर रायपुर तक हड़कंप मच गया था। लेकिन उनकी शिकायत पर कार्रवाई करने की बजाय दो दिनों बाद लोकेश सोरी को ही व्हाट्सअप पर संदेश भेजने के आरोप में गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। उन पर आरोप था कि उन्होंने दुर्गा का अपमान किया है और उनके संदेश से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। हालांकि, करीब 45 दिनों के बाद अदालत से उन्हें जमानत मिली और वे रिहा हुए। इसके बाद उन्हें साइनस की बीमारी ने उन्हें घेर लिया, जो अंतत: मैक्सिलरी कैंसर के रूप में सामने आया।

ठीक होते ही लोकेश ने खोला मोर्चा, बीते 6 नवंबर को रायपुर में महामना रावण जन्मोत्सव के दौरान लोकेश (माला पहने हुए)

कीमोथैरेपी के बाद स्वस्थ हो रहे हैं लोकेश

लेकिन अब लोकेश स्वस्थ हो रहे हैं। नाक से रक्तस्नाव बंद हो गया है। वे चलने-फिरने लगे हैं। बीते 6 नवंबर 2018 को रायपुर में महामना रावन महोत्सव में उन्हें मुख्य अतिथि बनाया गया। उन्होंने अपने संबोधन में एक बार फिर ब्राह्मणवादियों को ललकारा। उन्होंने कहा कि एक तरफ वे कैंसर से लड़ रहे थे, तो दूसरी तरफ ब्राह्मणवादियों की इस अफवाह से भी कि उन्हें दुर्गा के उपासकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने की सजा मिली है। फारवर्ड प्रेस ने इस संबंध में एक खबर भी प्रकाशित की थी, जिसका शीर्षक था – “कैंसर लोकेश सोरी के शरीर में ही नहीं, द्विजवादियों के मस्तिष्क में भी है!”  इस लेख ने उनकी हिम्मत बढ़ाई। इस लेख में कहा गया था – “महिषासुर के अपमान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने वाले सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता लोकेश सोरी कैंसर से जूझ रहे हैं। आरएसएस के लोग प्रचारित कर रहे हैं कि उनकी बीमारी दुर्गा के कोप का प्रभाव है। सरसंघचालक रहे गोलवलकर भी कैंसर से मरे थे, तो क्या यह माना जाए कि उन्हें महिषासुर का कोप लगा था?”

कार्यक्रम को संबोधित करते लोकेश सोरी

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ठीक होते ही ब्राह्मणवादी परंपराओं के खिलाफ हल्ला बोल

लोकेश बताते हैं कि एक बार उन्होंने भी यह मान लिया था कि अब वे बचेंगे नहीं। अस्पताल में चिकित्सक सही से इलाज नहीं कर रहे थे। परंतु, फारवर्ड प्रेस के प्रयासों से चिकित्सकों ने इलाज करना शुरू किया। बीते 23 अक्टूबर 2018 को रायपुर के बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर मेमोरियल अस्पताल में उन्हें कीमोथेरैपी दी गई। इसके बाद उनकी स्थिति में सुधार होना शुरू हो गया। लोकेश बताते हैं कि चिकित्सकों ने उन्हें बताया है कि अब आॅपरेशन की जरूरत नहीं रह गई है। केवल सिकाई से ही वे ठीक हो जाएंगे।

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लोकेश केवल इसी बात से खुश नहीं हैं कि वे स्वस्थ हो रहे हैं। उनकी खुशी की एक वजह यह भी है कि जिस दुर्गा के प्रकोप का हवाला देकर उन्हें और उनके परिवार को डराया जा रहा था,  उसका पर्दाफाश हो गया। ब्राहम्णवादी ऐसा इसलिए कह रहे थे, ताकि दूसरे लोग उनके वर्चवस्वादी संस्कृति के खिलाफ बोल न सकें। लोकेश बताते हैं कि बीमारी ने मेरे शरीर को कमजोर किया है, मेरे साहस और प्रतिबद्धता काे नहीं। उन्हें विश्वास है कि जल्द ही वे पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे और पूरे छत्तीसगढ़ में ब्राह्म्णवादी परंपराओं के खिलाफ हल्ला बोल का आह्वान करेंगे।

(कॉपी संपादन : प्रेम)


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