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गांधी को आंबेडकर की नजर से देखें दलित-बहुजन

आधुनिक काल में गांधी ऊंची जातियों और उच्च वर्ग के पुरुषों के ऐसे ही एक नायक रहे हैं, जो मूलत: उनके ही हितों के लिए आजीवन काम करते रहे। ऊंची जातियों और उच्च वर्ग के पुरुषों ने उन्हें महात्मा और राष्ट्रपिता का दर्जा दिया। लेकिन डॉ. आंबेडकर ने प्रमाणों के साथ इसे खारिज किया।...

अंकिता हत्याकांड : उत्तराखंड में बढ़ता जनाक्रोश और जाति का सवाल
ऋषिकेश के जिस वनंतरा रिजार्ट में अंकिता की हत्या हुई, उसका मालिक भाजपा के ओबीसी प्रकोष्ठ का नेता रहा है और उसके बड़े बेटे...
महाकाल की शरण में जाने को विवश शिवराज
निश्चित तौर पर भाजपा यह चाहेगी कि वह ऐसे नेता के नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतरे जो उसकी जीत सुनिश्चित कर सके। प्रधानमंत्री...
आदिवासी दर्जा चाहते हैं झारखंड, बंगाल और उड़ीसा के कुर्मी
कुर्मी जाति के लोगों का यह आंदोलन गत 14 सितंबर, 2022 के बाद तेज हुआ। इस दिन केंद्रीय मंत्रिपरिषद ने हिमालच प्रदेश की हट्टी,...
ईडब्ल्यूएस आरक्षण : सुनवाई पूरी, दलित-बहुजन पक्षकारों के तर्क से संविधान पीठ दिखी सहमत, फैसला सुरक्षित
सुनवाई के अंतिम दिन डॉ. मोहन गोपाल ने रिज्वांडर पेश करते हुए कहा कि सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग एक ऐसी श्रेणी...
पसमांदा अब राजनीतिक ब्रांड, संघ प्रमुख कर रहे राजनीति
“अहम बात यह है कि पसमांदा समाज किसी भी तरह की सांप्रदायिक राजनीति को या उसके विचार को नही मान सकता है। इसलिए ये...
भारतीय समाज में व्याप्त पूर्व-आधुनिक सोच का असर
देश भर में दलितों, पिछड़ों और‌ आदिवासियों के नरसंहार तथा उनके साथ ‌भेदभाव एवं गैरबराबरी से इतिहास भरा पड़ा है और कमोबेश यह आज...
आंखों-देखी : दलित-बहुजनों में बढ़ रहा पितरों को सुख पहुंचाने का अंधविश्वास
समाज विज्ञानी अभी तक हमें यही बताते आये हैं कि आर्थिक संपन्नता के बाद ही व्यक्ति अपने संस्कृतिकरण की दिशा में अग्रसर व प्रयासरत...
‘मिमी’ : केवल एक सरोगेट मदर की कहानी नहीं
वैसे तो फ़िल्म सरोगेसी के मुद्दे को केंद्र में रखकर बनायी गयी है, मगर कहानी के भीतर न जाने कितने ही और मुद्दे बारीकी...
बहस-तलब : जबरन विवाह, नस्लभेद और जातिभेद आधुनिक गुलामी के मुख्य हथियार
आज के दौर में पेरियार की बातें इसलिए भी सही साबित हो रही हैं क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जिसे जबरन विवाह कहा जाता है,...
उत्तर भारत की महिलाओं के नजरिए से पेरियार का महत्व
ई.वी. रामासामी के विचारों ने जिस गतिशील आंदोलन को जन्म दिया उसके उद्देश्य के मूल मे था – हिंदू सामाजिक व्यवस्था को जाति, धर्म...
परिवर्तन का सारथी बन रहा हरियाणा का सत्यशोधक फाउंडेशन
हरियाणा समाज के भीतर भारी उथल-पुथल चल रही है और फुले की भाषा में जिन्हें शूद्र-अतिशूद्र (पिछड़े-दलित) और महिलाएं कहते हैं, उनका शिक्षित-सचेत हिस्सा...
साक्षात्कार : ‘कुछ बातों को दलित आत्मकथाकारों को नजरअंदाज करना चाहिए था’
जो हिंदी साहित्य का सौंदर्य शास्त्र माना जाता है, जिसमें रस, अलंकार, छंद और विंब-विधान आदि चीजों की जो वकालत की जाती है, और...
‘भारत को गैर-भारतीयों ने अधिक गहराई से समझा’
‘मैं यह कहूंगी कि अगर प्राचीन भारत के इतिहास पर जब लेखक लिखता है चाहे वह किसी दृष्टिकोण का लेखक हो, किसी विचारधारा का...
पुरुषोत्तम अग्रवाल के कबीर
इतिहास लेखन से पहले इतिहासकार क्या लिखना चाहता है, उसकी परिकल्पना कर लेता है और अपनी परिकल्पना के आधार पर स्रोतों का चयन और...
दलित कविता में प्रतिक्रांति का स्वर
उत्तर भारत में दलित कविता के क्षेत्र में शून्यता की स्थिति तब भी नहीं थी, जब डॉ. आंबेडकर का आंदोलन चल रहा था। उस...
गांधी को आंबेडकर की नजर से देखें दलित-बहुजन
आधुनिक काल में गांधी ऊंची जातियों और उच्च वर्ग के पुरुषों के ऐसे ही एक नायक रहे हैं, जो मूलत: उनके ही हितों के...
उत्तर भारत की महिलाओं के नजरिए से पेरियार का महत्व
ई.वी. रामासामी के विचारों ने जिस गतिशील आंदोलन को जन्म दिया उसके उद्देश्य के मूल मे था – हिंदू सामाजिक व्यवस्था को जाति, धर्म...
सत्यशोधक फुले
ज्योतिबा के पास विचारों की समग्र प्रणाली थी और वह उन प्रारंभिक विचारकों में से थे, जिन्होंने भारतीय समाज में वर्गों की पहचान की...
जब गोरखपुर में हमने स्थापित किया प्रेमचंद साहित्य संस्थान
छात्र जीवन में जब मैं गोरखपुर विश्वविद्यालय में अध्ययनरत था तथा एक प्रगतिशील छात्र संगठन से जुड़ा था, तब मैंने तथा मेरे अनेक साथियों...
कबीर का इतिहासपरक निरपेक्ष मूल्यांकन करती किताब
आमतौर पर हिंदी में कबीर के संबंध में उनके पदों का पाठ उनकी व्याख्या और कबीर के काव्य में सामाजिकता जैसे शीर्षक पर साहित्य...